कहा जाता है कि संतों की करुणा और संवेदना का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पशु-पक्षी भी उस आत्मीयता और प्रेम को महसूस करते हैं। यह बात उस समय सच होती दिखाई दी, जब बुंदेलखंड की अयोध्या कही जाने वाली ओरछा की पावन धरती पर एक दुर्लभ गिद्ध संत योगी सत्यनाथ के सामने आकर शांत भाव से बैठ गया। संत और गिद्ध के बीच का यह मौन संवाद वहां मौजूद लोगों के लिए न केवल आश्चर्य का विषय बना, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच के अद्भुत रिश्ते का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर गया।
बुंदेलखंड में योगी सत्यनाथ के नाम से चर्चित संत जब ऐतिहासिक नगरी ओरछा पहुंचे, तब एक गिद्ध अचानक उनके समीप आकर बैठ गया और लंबे समय तक एकटक उनकी ओर देखता रहा। संत भी उसी शांति और करुणा के भाव से उस पक्षी को निहारते रहे। यह दृश्य देखने वाले लोगों ने इसे केवल एक संयोग नहीं, बल्कि संवेदना, विश्वास और सह-अस्तित्व का एक अद्भुत क्षण बताया।
गौरतलब है कि ओरछा नगरी देश में गिद्ध संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक मानी जाती है। यहां की ऐतिहासिक छतरियां, मंदिर और प्राचीन इमारतें वर्षों से गिद्धों का सुरक्षित आश्रय स्थल बनी हुई हैं। वन विभाग द्वारा लंबे समय से इन विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यही कारण है कि आज भी यहां कई प्रजातियों के गिद्ध देखने को मिल जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में गिद्धों की संख्या में आई भारी गिरावट लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
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एक समय लाखों की संख्या में दिखाई देने वाले गिद्ध आज बेहद सीमित संख्या में रह गए हैं। वर्ष 2021 में टीकमगढ़ जिले में हुई गिद्ध गणना के दौरान केवल 60 गिद्ध दर्ज किए गए थे। पूर्व और वर्तमान आंकड़ों को मिलाकर मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र, विशेषकर ओरछा क्षेत्र में अब मात्र 87 गिद्ध ही शेष बचे हैं।
ऐसे समय में जब प्रकृति और वन्यजीवों का अस्तित्व लगातार संकट में है, तब ओरछा में संत योगी सत्यनाथ और दुर्लभ गिद्ध के बीच का यह मौन मिलन केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच प्रेम, विश्वास और सह-अस्तित्व का एक भावुक संदेश बनकर सामने आया है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि यदि मनुष्य के भीतर करुणा और संवेदना जीवित रहे, तो प्रकृति भी उसे उसी आत्मीयता से स्वीकार करती है।