वैसे तो धार्मिक नगरी उज्जैन में कई सिद्ध स्थल हैं। लेकिन आगामी पांच मई 2025 से बाबा महाकाल के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को महाराष्ट्र के अष्टविनायक गणेश के दर्शन भी एक ही स्थान पर हो पाएंगे। सात वर्षों पूर्व इस मंदिर का शिलापूजन हुआ था, जिसके बाद मंत्रोच्चार के साथ इस मंदिर का भव्य निर्माण राजस्थान व गुजरात के कलाकारों द्वारा किया गया है। पांच दिवसीय श्री अष्टविनायक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव और श्री गणेश महायज्ञ के बाद श्रद्धालु यहां महाराष्ट्र के अष्ट विनायकों के साथ ही माता रिद्धि सिद्धि व भगवान श्री गणेश की मुस्कुराती हुई प्रतिमा के दर्शन कर पाएंगे।
अष्टविनायक मंदिर के प्रमुख सेवादार पंडित हेमंत व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि यह भारत का एकमात्र ऐसा पहला मंदिर होगा, जहां पर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध श्री अष्टविनायक एक ही स्थान पर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देंगे। इस मंदिर की परिकल्पना तो बचपन से ही पंडित व्यास के मस्तिष्क में थी। लेकिन उन्होंने अपने भाई पंडित संजय व्यास और पंडित शैलेंद्र व्यास के साथ मिलकर इस संकल्प को पूरा किया। उज्जैन के ग्राम सवाराखेड़ी सिंहस्थ बायपास मार्ग पर लगभग 51 करोड़ की सात बीघा जमीन पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है। एक युवा पर भगवान श्री गणेश का ऐसा आशीर्वाद हुआ कि 32 वर्षों तक की गई मेहनत के बाद उसने व्यापार के लिए खरीदी 51 करोड़ की बेशकीमती सात बीघा जमीन पर भगवान श्री अष्टविनायक के मंदिर का निर्माण करवा दिया।
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अष्टाविनायकों की यह प्रतिमा हूबहू महाराष्ट्र में विराजित श्री गणेश की प्रतिमाओं की तरह ही है। सात वर्षों में बनकर तैयार हुए इस मंदिर के बारे में पंडित व्यास ने बताया कि यह पहला ऐसा मंदिर है, जिसका निर्माण मंत्रोच्चार के साथ किया गया है। शिलापूजन के दौरान किए गए पूजन अर्चन के बाद इस स्थान पर प्रतिदिन चीलम पर श्री गणेश मंत्र चलाया जाता था, जिसको सुनते और उच्चारण करते हुए राजस्थान और गुजरात के कलाकार ही नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन मंदिर निर्माण से संबंधित काम करते थे।
इस दिन होंगे यह आयोजन
श्री अष्टविनायक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्री गणेश महायज्ञ की शुरुआत 30 अप्रैल बुधवार से होगी। इसके बाद प्रतिदिन मंदिर में पूजन अर्चन, हवन, मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा, पूर्णाहुति और महाआरती जैसे आयोजन किए जाएंगे। जो की चार मई तक जारी रहेंगे और उसके बाद पांच मई को मंदिर का लोकार्पण समारोह होगा, जिसमें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ ही साधु संत विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
अब होगा सपना साकार
पंडित हेमंत व्यास ने बताया कि भगवान श्री गणेश के प्रति बचपन से ही मेरी अगाध आस्था है। गणेश उत्सव के दौरान में मिट्टी से भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का निर्माण करता और घर पर पूरे पंडाल को सजता था। मेरा ऐसा संकल्प था कि अगर भगवान श्री गणेश की मुझ पर कृपा होगी तो मैं उनका भव्य मंदिर बनाऊंगा। बचपन में देखा मेरा यह सपना पिता डॉ. चंद्रकांत व्यास, मां सुशीला व्यास के आशीर्वाद और भाई संजय व्यास, शेलेन्द्र व्यास के सहयोग से आप पूरा होने जा रहा है।
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मंदिर में रहेगी यह व्यवस्थाएं
भगवान श्री अष्टविनायक के इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल मंदिर परिसर के साथ ही यहां धर्म संसद, स्वागत कक्ष, प्रसादम, स्वाध्याय कक्ष और सभी व्यवस्थाए रहेगी। मंदिर में गणेश उत्सव के साथ ही प्रत्येक त्यौहार को उत्साह और उल्लास के साथ भी मनाया जाएगा।
अनेकों बार पहुंचे अष्टविनायक के दरबार फिर करवाया मंदिर का निर्माण
अष्टविनायक गणेश मंदिर के निर्माण की शुरुआत से लेकर आज तक पंडित हेमंत व्यास कई बार महाराष्ट्र में विराजित अष्टविनायक के दरबार में परिवार सहित जा चुके हैं। उन्होंने इन मंदिरों में विराजित श्री गणेश के जैसी प्रतिमाएं उज्जैन के अष्टविनायक गणेश मंदिर के लिए भी बनवाई है। साथ ही अष्टविनायक की यात्रा कर इस मंदिर के निर्माण की आज्ञा भी अष्टविनायकों से ली है। इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में अष्टविनायक गणेश मंदिर के पुजारियो को भी आमंत्रित किया गया है।
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मंदिर में कुछ यह भी है खास
इस धाम की परिकल्पना के केंद्र में भारत के महाराष्ट्र राज्य के प्रसिद्ध अष्टविनायक हैं, जिनकी कृपा और कीर्ति विश्वव्यापी है। इन्हीं अष्टविनायक के स्वरूप एक ही भव्य मंदिर में अब इस धाम में दर्शनार्थ सुलभ है। विशाल परिसर में स्थित और पारंपरिक भारतीय मंदिर स्थापत्यकला के अनुरूप निर्मित देवालय में मुख्य शिखर के अतिरिक्त आठ उप-शिखरों का निर्माण कर अष्टविनायक के मङ्गल विग्रह स्थापित किए गए हैं।
मध्य में भगवान श्री गणेश की विशाल और सुंदर प्रतिमा है, जिनके साथ देवी ऋद्धि-सिद्धि भी विराजमान हैं। वहीं, मुख्य मंदिर में प्रवेश के लिए भव्य द्वार है और लाल पत्थर से निर्मित नक्काशीदार मंडप से एक ही स्थान पर स्थिर रहकर अष्टविनायक के सभी आठों स्वरूप का दर्शन करने की अकल्पनीय सुविधा है। जो भक्तों को गणेश कृपा का प्रत्यक्ष साक्षात्कार कराने में समर्थ है। मंदिर से सटा परिक्रमा पथ भगवान की परिक्रमा के लिए है, जिसे करने के बाद जन्म-मरण के संसार चक्र से मुक्ति का भाव रख सकेंगे भक्त है।