पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत बरा मोहल्ला मंगठार में 6 जून 2025 की सुबह एक सनसनीखेज वारदात सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। मोहल्ले के ही निवासी 45 वर्षीय मनोज पिल्ले का शव उनके घर के पास खून से लथपथ हालत में मिला। शव की स्थिति देखकर यह साफ हो गया कि हत्या बेहद क्रूरतापूर्वक की गई थी। सिर पर पत्थर से वार किए गए थे।
स्थानीय नागरिकों की सूचना पर पाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात आरोपी के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। प्रारंभिक छानबीन में पुलिस को कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला, लेकिन जब पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की तब इस हत्या की परतें धीरे-धीरे खुलनी शुरू हुईं।
13 साल पुरानी रंजिश से जुड़ा निकला हत्या का राज
जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पूछताछ में शिवेंद्र चतुर्वेदी नामक युवक ने खुलासा किया कि इस हत्या के पीछे एक 13 साल पुराना बदला छिपा है। शिवेंद्र ने बताया कि वर्ष 2012 में उसकी मां कमला चतुर्वेदी की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हुई थी। उस समय आरोप था कि मनोज पिल्ले ने ही उनके घर में आग लगाकर उन्हें जिंदा जला दिया था। शिवेंद्र के दिल में वर्षों से पल रही बदले की आग आखिरकार 5 जून 2025 की रात भड़क उठी। उसने अपने साथी प्रवीण नामदेव के साथ मिलकर मनोज पिल्ले की हत्या की साजिश रची और अंजाम भी दे डाला।
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शराब पार्टी के बाद दिया वारदात को अंजाम
शिवेंद्र और प्रवीण दोनों लेबर कॉलोनी मंगठार के निवासी हैं। दोनों ने मनोज पिल्ले को पांच जून की रात शराब पीने के बहाने बुलाया। रात करीब 9 बजे तीनों साथ बैठे और शराब पी। इसी दौरान शिवेंद्र ने रंजिश को याद करते हुए अपने साथी प्रवीण के साथ मिलकर मनोज के सिर पर पत्थर से हमला कर उसकी निर्मम हत्या कर दी, लेकिन पुलिस की सतर्कता और तेज़ कार्रवाई के चलते कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिए गए। पूछताछ में उन्होंने जुर्म कबूल कर लिया।
10 घंटे में अंधी हत्या का खुलासा
इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करने में उमरिया पुलिस की भूमिका उल्लेखनीय रही। पुलिस अधीक्षक उमरिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और अनुविभागीय अधिकारी पाली के निर्देशन में थाना पाली की टीम ने महज 10 घंटे के भीतर अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझा दी। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक मदन लाल मरावी, उप निरीक्षक विजय कुमार सेन, सहायक उप निरीक्षक शशि कुमार द्विवेदी, प्रधान आरक्षक बेयन्त राने, रनवीर, सुखदेव, महेश साहू तथा महिला आरक्षक तनु द्विवेदी और स्वाती जैन की विशेष भूमिका रही। पुलिस ने दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।