अक्सर हमने सुना है कि,एंबुलेंस को कॉल करने पर भी ग्रामीणों को एम्बुलेंस नसीब नहीं होती, लेकिन विदिशा जिले के इस गांव में एम्बुलेंस प्राप्त होने के बाद भी एक अनोखा मामला सामने आया है। कीचड़ से सना हुआ रास्ता होने के कारण 500 मीटर की दूरी पर ही एंबुलेंस फंस गई, जिसके बाद गर्भवती महिला को बाइक पर बैठाकर अस्पताल तक पहुंचाया गया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक ग्यारसपुर तहसील की ग्राम पंचायत मढिया जामुन के आदिवासी ग्राम गमिरिया में रविवार सुबह राखी पत्नी दिनेश सहरिया को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थानीय आशा कार्यकर्ता ने 108 एम्बुलेंस को फोन लगाकर बुलाया। लेकिन गांव के रास्ते में लगभग 500 मीटर से अधिक की दूरी तक बारिश के चलते भारी कीचड़ होने के कारण एम्बुलेंस महिला के घर तक नहीं पहुंच पाई। इसके कारण गर्भवती महिला को उसके परिजन मोटरसाइकिल पर बैठाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैदरगढ़ लेकर पहुंचे।
ग्रामीण कल्लू सहरिया, जालम सिंह सहरिया, गुलाब सिंह सहरिया, लक्ष्मण सिंह सहरिया ने बताया कि बारिश के समय यहां पर 108 एंबुलेंस एवं डायल हंड्रेड नहीं पहुंच पाती है, जिससे ग्रामीणों को सुविधाएं नहीं मिल पातीं। सबसे अधिक पीड़ा उस समय होती है जब कोई गर्भवती महिला पेट दर्द होने पर समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाती, जिसके चलते कभी कभार गर्भवती महिला की मौत होने का खतरा भी बढ़ जाता है एवं उसके बच्चे को भी खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत के अधिकारियों और सरपंच को बता चुके हैं, परंतु अभी तक रास्ता पक्का नहीं बन पाया है।
इस मामले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर तखत सिंह मीणा का कहना है कि राखी सहरिया 9 महीने के गर्भ से थी। उसको डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर पहुंचना था, जहां आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा महिला के घर पर पहुंचकर आवश्यक सहयोग किया गया और 108 एंबुलेंस को बुलाकर अस्पताल ले जाने की तैयारी की, लेकिन 108 एम्बुलेंस रास्ता खराब होने के चलते 1 किलोमीटर दूर खड़ी रही और गर्भवती महिला को कीचड़ की वजह से उसके घर तक लेने के लिए नहीं पहुंच पाई।
गौरतलब है कि मातृ और शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है, लेकिन घरों में प्रसव होने और रास्ता खराब होने की वजह से कई प्रसूताएं समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पातीं, जो कि एक गंभीर समस्या है। इसमें सुधार करने की आवश्यकता है, जिससे कि भविष्य में घरों में होने वाली डिलीवरी और मातृ शिशु मृत्यु दर को भी रोका जा सके। जिससे परिजनों को गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए मोटरसाइकिल पर अस्पताल न ले जाना पड़े।