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The Chief Secretary will conduct the final testing of the electrical systems for the 54 floodgates at Madhopur Headworks, which have undergone a major overhaul.
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माधोपुर हैडवर्क्स के 54 फ्लड गेटों से आधे हो चुके इलेक्ट्रिकल, फाइनल टेस्टिंग करेंगे चीफ सेक्रेटरी
मानसून शुरू होने को करीब 20 दिन का समय बचा है। ऐसे में माधोपुर हैडवर्क्स पर तीन माह पहले एसडीओ का चार्ज संभालने वाले अधिकारी ने 54 फ्लड गेटों की मेंटनेस सहित बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां मुकम्मल बता दी हैं। अगस्त 2025 में जब रावी दरिया में बाढ़ आई थी तो फ्लड गेट ना खुलने की वजह से भीषण तबाही देखने को मिली थी। संबंधित विभाग के एक कर्मचारी की फ्लड गेट टूट जाने से मौत हो गई। जिसके बाद बाढ़ स्थिति से पहले चार्ज संभालने वाले एसडीओ, जेई सहित तीन लोगों को सस्पेंड कर दिया गया था।
जब इन फ्लड गेटों की मुरम्मत सहित अन्य प्रबंधों की किसी एक्सपर्ट से बात की गई तो उसका कहना था कि माधोपुर हैडवर्क्स के फ्लड गेट की जानकारी हासिल करने में कुछ समय लगता है क्योंकि इसकी मेंटनेस से लेकर अन्य सुरक्षा की जिम्मेदारी कठोर होती है। नए आए अधिकारी बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए कोई जल्दबाजी ना करें और सभी गेट की इंस्पेक्शन समय-समय पर करें क्योंकि बाढ़ की स्थिति कभी भी बन सकती है।
माधोपुर हैडवर्क्स के एसडीओ राजीव कुमार ने कहा कि सभी फ्लड गेटों में आधे इलेक्टि्रक हो चुके हैं और कुछ का काम अभी चल रहा है। 30 जून को फाइनल टेस्टिंग सिंचाई विभाग के चीफ सेक्रेटरी करेंगे। दोनों तरह से इलेक्ट्रॉनिक मोटराइजेशन और मैन्युअल गेट खुलेंगे। इन गेटों की मेंटनेस भी समय पर हो रही है। निचले हिस्से में पानी के कटान को रोकने के लिए 40 फीट के विशाल वायर क्रेट्स का निर्माण मुकम्मल किया जा चुका है। इस बार तकनीक और बुनियादी ढांचे को इस कदर मजबूत किया गया है कि पिछले साल जैसी अनहोनी की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। टूटे गेट भी रिपेयर हो चुके है।
बता दें कि 26-27 अगस्त 2025 की दरमियानी रात को पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के रंजीत सागर डैम से लाखों क्यूसिक पानी रावी दरिया में छोड़ा गया। जिससे रावी पूरे उफान पर था। जिसके चलते माधोपुर बेराज के गेट पानी के अप्रत्याशित और प्रचंड दबाव को झेल नहीं पाए और क्षतिग्रस्त होकर टूट गए थे। गेट टूटने के कारण अनियंत्रित पानी ने निचले इलाकों में भारी तबाही दिखी और बाढ़ की स्थिति उत्पन हो गई। उस समय विभाग के अधिकारी पूरी तरह से माधोपुर हैडवर्क्स के गेट भी नहीं खोल पाए थे।
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