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पद्मश्री डॉ सुरजीत पातर की याद में उनके पैतृक में कविता समागम का आयोजन
पद्मश्री डॉ सुरजीत पातर की याद में उनके पैतृक गांव पत्तड़ कलां में कविता और सुरों का समागम कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें प्रसिद्ध कवियों ने सुरजीत पातर की लिखी रचनाएं को सुनाया। कार्यक्रम में पद्मश्री पातर जी की पत्नी भुपिंदर कौर पातर विशेष तौर शामिल हुईं और भावुक शब्दों में कहा कि वह एक ऐसी सख्शियत थे जिनके जाने के बाद लोग मुझे प्रोग्राम में बुलाते गया। उन्होंने पति की कविता भी सुनाई। कार्यक्रम में पंजाबी गायक दलविंदर दयालपुरी ने भी उनकी रचना को गीत स्वरूप बनाकर पेश किया।
ओ पत्तड़ कलां दा पातर सी... कविता नूं कर सुरजीत गया।
कार्यक्रम में डॉ सुरजीत पातर के पुत्र मनराज पातर ने पिता की लिखी कविताओं का वादन कर समां बांध दिया। उन्होंने जगा दे मोम बत्तियां सहित कई कविताएं और उनकी शायरी को आवाज दी।
हमारे बाद महफ़िल में अफसाने बयां होंगे, नजरें हमको देखेंगी न जाने हम कहां होंगे।
झांजरा नूं गाके भी सुरजीत पातर हो गया। पैसा... पैसे दे नाल पत्री खोली जा सकदी-किस्मत नहीं खरीदी जानी नी। पैसे दे नाल कलम खरीदी जा सकदी... नहीं खरीद सकते कविता-कहानी नहीं।दरिया दिलों को हड़ां (बाढ़) दा पानी रोक नहीं डुबा नहीं सकता।
वक्ताओं ने कहा कि कनाडा के मोंट्रियल शहर पंजाबी कला केंद्र शुरू किया था जिसे खड़ा करने में डॉ सुरजीत पातर ने बहुत मदद की थी।
प्रोफेसर हरजीत सिंह अश्क ने कहा कि वह डॉ सुरजीत पातर के साथ पटियाला और पंजाबी यूनिवर्सिटी लुधियाना में रहे। उन्होंने पंजाबी के साहित्य को संभाला और नई दिशा दी। उन्होंने शायरी अंदाज में कहा कि पहचान मेरी उस को भूल गई होगी, याद बनकर आंसुओं में धुल गई होगी तस्वीर अपने सीने जो लगाए रखी अखबार की रद्दी में वह रुल गई होगी।
साइंस-टेक्नोलॉजी पंजाब के पदाधिकारी और चेयरमैन एक्साइज -टेक्सेशन प्रोफेसर कंवर इकबाल सिंह ने कहा कि स्कूल का नाम डॉ सुरजीत पातर के नाम पर रखे जाने की मांग पहले ही की जा रही है। मैं ऐलान नहीं करूंगा, पत्र लिखकर गांववासियों के साथ मुख्यमंत्री के पास जाएंगे और काम करवाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी गुरदेव सिंह बोला, सुरजीत सजन, कुलभूषण, लाली करतारपुरी, मंगल सिंह सहित अन्यों ने उनकी रचनाओं पर रोशनी डाली।
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