राजस्थान में छात्र राजनीति एक बार फिर उफान पर है। छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर प्रदेश भर में छात्रों के बीच आक्रोश साफ तौर पर देखा जा रहा है। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) के नेतृत्व में बाड़मेर से सैकड़ों छात्र कार्यकर्ताओं का एक काफिला जयपुर के लिए रवाना हुआ, जहां पांच अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
जयपुर कूच से पहले बाड़मेर में एक प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्र नेताओं ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। NSUI जिला अध्यक्ष भूपेंद्र मेघवाल के नेतृत्व में रवाना हुए इस काफिले को युवा नेता लक्मण सिंह गोदारा, जिला परिषद सदस्य ईलम दिन समेजा, जगदीश गोदारा, रुपेश गढ़वीर, चंद्रवीर परिहार और मानवेन्द्र कड़वासरा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर छात्र कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त जोश और आंदोलन के लिए संकल्प दिखाई दिया।
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सरकार की चुप्पी के खिलाफ छात्र सड़कों पर
जिला अध्यक्ष भूपेंद्र मेघवाल ने रवाना होते समय कहा कि राज्य सरकार छात्रसंघ चुनाव को लेकर लंबे समय से चुप्पी साधे बैठी है, जबकि छात्र समुदाय निरंतर अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि छात्र शक्ति सड़कों पर उतरकर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए निर्णायक लड़ाई लड़े। उन्होंने सभी छात्रों से अपील की कि वे अधिकतम संख्या में जयपुर पहुंचें और यह साबित करें कि छात्र शक्ति को दबाया नहीं जा सकता।
मेघवाल ने जानकारी दी कि पांच अगस्त को जयपुर के शहीद स्मारक से मुख्यमंत्री आवास तक एक विशाल मार्च निकाला जाएगा। इसमें पूरे राजस्थान से हजारों NSUI कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।
दो साल से ठप हैं छात्रसंघ चुनाव, सरकारें चुप
गौरतलब है कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आखिरी बार छात्रसंघ चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। इसके बाद 2023 में गहलोत सरकार ने चुनाव नहीं करवाए और 2024 में सत्ता में आई भाजपा सरकार ने भी छात्रसंघ चुनावों से दूरी बनाए रखी। जबकि राजस्थान में परंपरागत रूप से छात्रसंघ चुनाव हर साल अगस्त-सितंबर में होते रहे हैं। ऐसे में 2025 में चुनाव की संभावित तिथियां नजदीक आते ही छात्र संगठनों ने फिर से मोर्चा खोल दिया है। NSUI इस मुद्दे को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान चला रही है और जयपुर में होने वाला यह प्रदर्शन उसी का एक अहम हिस्सा है।
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छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार नहीं छीना जा सकता
छात्र संगठन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि छात्रसंघ चुनाव केवल राजनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार और नेतृत्व विकास का माध्यम हैं। सरकार की उदासीनता को लेकर छात्रों में गहरी नाराजगी है, जिसे अब वह सड़कों पर उतरकर जाहिर कर रहे हैं।