राजस्थान के उदयपुर में रेजिडेंट डॉक्टर की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ना शुरू कर दिया है। कोटा में भी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन बुधवार से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार पर उतर गए हैं। रेजिडेंट डॉक्टर सुबह काम छोड़कर मेडिकल कॉलेज परिसर में लाइब्रेरी के पास इकठ्ठा हुए और उदयपुर में डॉक्टर की मौत के मामले में न्याय की मांग की। वहीं, रेजिडेंट डॉक्टर्स ने आज लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया है। कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबीएस, जेकेलोन, एसएसबी, न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, रामपुरा हॉस्पिटल के 600 के करीब रेजिडेंट डॉक्टर्स सम्पूर्ण इमरजेंसी सेवाओं सहित कार्य बहिष्कार पर चले गए। जिससे हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं पर असर पड़ा। वहीं ओपीडी और आईपीडी में सीनियर डॉक्टर्स को कमान संभालनी पड़ी।
कोटा रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हेमंत शर्मा ने बताया कि आरएनटी उदयपुर में डॉ. रवि शर्मा की मौत दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा चिकित्सक भी समाज का एक अभिन्न अंग होता है। सरकार और प्रशासन को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। उदयपुर में चिकित्सक की मौत के मामले में उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फेरबदल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में विसंगतियां आई है। इस कारण समाज में चिकित्सा पेश को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। यह घटना न केवल डॉ. रवि की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पूरे चिकित्सा समुदाय की साख पर भी गहरा आघात पहुंचाती है।
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उदयपुर की घटना को लेकर पहले कोटा मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट पिछले तीन दिनों से सांकेतिक रूप से रोज 2 घंटे पेन डाउन हड़ताल कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद भी प्रशासन का रवैया नकारात्मक और उदासीन बना हुआ है। इसलिए अब सभी ने कंधे से कंधा मिलाकर इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का फैसला किया है। जब तक डॉ. रवि को न्याय नहीं मिलेगा और दोषियों कार्रवाई नहीं होगी। तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं रेजिडेंट चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से चरमा गई है। वहीं सीनियर डाॅक्टर्स ने कमान संभाली और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाया।