आस्था, परंपरा और ग्रामीण एकजुटता का अद्भुत संगम इस बार कोटपूतली क्षेत्र के कुहाड़ा गांव स्थित प्रसिद्ध छापाला भैरूजी मंदिर में देखने को मिल रहा है। अरावली की पहाड़ियों में बसे इस पावन धाम पर शुक्रवार को लगने वाले लक्खी मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगा हुआ है।
इस वर्ष मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 651 क्विंटल चूरमे की महाप्रसादी है, जिसे किसी व्यावसायिक हलवाई ने नहीं, बल्कि गांव के लोगों ने आपसी सहयोग और श्रमदान से तैयार किया है। बीते एक माह से ग्रामीण दिन-रात जुटकर इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में लगे हुए हैं।
थ्रेसर से पिसीं हजारों बाटियां
सोमवार और मंगलवार को चूरमे के लिए तैयार की गई हजारों बाटियों की दो थ्रेसरों की मदद से पिसाई कराई गई। यह दृश्य खासा आकर्षक रहा, जब आमतौर पर खेतों में अनाज निकालने वाली मशीनें मंदिर की महाप्रसादी तैयार करने में उपयोग होती नजर आईं। बड़ी संख्या में ग्रामीण इस कार्य में सहभागी बने।
जेसीबी से मिलाया गया सूखा मेवा और घी-खांड
बुधवार को चूरमे में जेसीबी मशीन की सहायता से खांड, देशी घी, काजू, बादाम, किशमिश और खोपरा मिलाया गया। जानकारी के अनुसार, प्रसादी में करीब 165 क्विंटल घी-खांड का उपयोग किया गया है। इसमें प्रयुक्त देशी घी ग्रामीणों द्वारा श्रद्धा भाव से दान स्वरूप दिया गया है।
मेले की शुरुआत गुरुवार सुबह महिलाओं द्वारा निकाली जाने वाली भव्य कलश यात्रा से होगी। पारंपरिक वेशभूषा में सजी सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंदिर तक पहुंचेंगी। शुक्रवार को मुख्य मेले के दिन मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। दोपहर बाद धमाल कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
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इस बार मेले का सबसे विशेष आकर्षण हेलीकॉप्टर से की जाने वाली पुष्पवर्षा होगी। आयोजकों का दावा है कि यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बनेगा। श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। छापाला भैरूजी का यह मेला अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण एकता, लोक आस्था और परंपरा की सशक्त मिसाल बनकर उभर रहा है।