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Rajasthan: कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, 300 मीट्रिक टन खाद की बिक्री पर रोक | Kirori Lal Meena
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Rajasthan: कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, 300 मीट्रिक टन खाद की बिक्री पर रोक | Kirori Lal Meena
Video Published by: पंखुड़ी श्रीवास्तव Updated Mon, 23 Jun 2025 12:32 PM IST
राजस्थान में कृषि क्षेत्र की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में रविवार को भीलवाड़ा जिले में स्थित ओस्तवाल फोसकेम इंडिया लिमिटेड खाद निर्माण फैक्टरी पर कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। जयपुर और भीलवाड़ा की कृषि आयुक्तालय टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई में फैक्टरी में तैयार 300 मीट्रिक टन खाद की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई और फैक्ट्री को विधिवत नोटिस जारी किया गया.
यह कार्रवाई राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के निर्देश पर की गई। उन्हें शिकायत प्राप्त हुई थी कि कुछ खाद निर्माण कंपनियां गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन कर रही हैं और बारिश के मौसम में खाद का अनुचित भंडारण कर रही हैं, जिससे किसानों तक खराब खाद पहुंचने की आशंका है।
भीलवाड़ा से 25 किलोमीटर दूर हमीरगढ़ तहसील के ओजियार गांव में स्थित इस फैक्टरी में सिंगल सुपर फॉस्फेट और यूरिया खाद का उत्पादन किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि हाल की बारिश के बावजूद खाद की बोरियों को सुरक्षित तरीके से नहीं रखा गया था। बोरियों की स्टैकिंग असुरक्षित पाई गई और नीचे की दो परतें पूरी तरह से भीग चुकी थीं, जिससे खाद की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। टीम ने खाद के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण हेतु लिए। रिपोर्ट में सामने आया कि खाद निर्माण में एनालिसिस प्रक्रिया मानकों के अनुरूप नहीं थी। न तो सैंपलिंग सही ढंग से की गई और न ही खाद की गुणवत्ता की जांच उचित पद्धति से की गई। सबसे बड़ी खामी यह पाई गई कि खाद की जांच कर रहे विश्लेषक प्रशिक्षित नहीं थे, जबकि नियमों के अनुसार खाद विश्लेषण का कार्य केवल प्रशिक्षित (ट्रेन्ड) विशेषज्ञों द्वारा ही किया जाना चाहिए।
मानकों के अनुसार बारिश के मौसम में खाद की बोरियों को जमीन से ऊपर लकड़ी की पट्टियों पर रखा जाना चाहिए और सुरक्षित स्टैकिंग अनिवार्य है, लेकिन फैक्टरी में इन नियमों की अनदेखी की गई। न तो लकड़ी की पट्टियों का उपयोग किया गया और न ही स्टैकिंग सुरक्षित थी।
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