आज हम बात कर रहे हैं सिरोही जिले के आबूरोड स्थित हाईटेक किचन की। जहां पर रोजाना सोलर एनर्जी से महज दो घंटे में 40 हजार लोगों का भोजन बनाया जाता है। सुनने में शायद एकबारगी किसी को विश्वास नहीं हो, लेकिन यह शत प्रतिशत सही है। यह किचन ब्रह्माकुमारीज संस्थान के आबूरोड स्थित अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन परिसर में बना है।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के इस विशाल किचन को बेहद हाईटेक तरीके से डिजाइन किया गया है, ताकि भोजन पकाने में सुविधा हो। यहां एक बार में एक तपेले में सात हजार लोगों के लिए सब्जी, चावल और दाल बनकर तैयार हो जाती है। इसे पकाने में महज 30 मिनट लगते हैं। इसके बाद आटोमैटिक सिस्टम से पकी हुईं सब्जियों को अन्य दूसरे तपेले में डालकर भोजन के लिए ले जाया जाता है। इस किचन को नाम दिया गया है शिव भोलेनाथ का भंडारा। जैसा नाम, वैसा ही विशाल। नई टेक्नोलॉजी से लैस यह भंडारा पूरी तरह से हाईटेक है। साफ-सफाई इतनी की आपको ढूंढने से एक मक्खी तक नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं यहां पूरा भोजन सौर ऊर्जा से तैयार होता है।
एक मशीन से एक घंटे में बन जाती हैं दो हजार रोटियां
इस विशाल किचन में रोटियां बनाने के लिए चार आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों द्वारा एक घंटे में दो हजार रोटियां बनकर एवं सिककर तैयार हो जाती हैं। इन सभी मशीनों से एक घंटे में कुल आठ हजार रोटियां बनाई जा सकती हैं।
4,600 लोगों की डायनिंग में है भोजन व्यवस्था
भंडारे से ही बड़ा डायनिंग हॉल बना है, जिसमें एक साथ 4,600 लोगों के बैठकर भोजन करने की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए डॉयनिंग हॉल में टेबल-कुर्सियां लगाई गई हैं। यहां सवेरे सात बजे से नाश्ता, 11:30 बजे से दोपहर का भोजन और शाम छह बजे से रात्रि भोजन शुरू हो जाता है। भोजन के बाद तीनों टाइम विशेष साफ-सफाई की जाती है।
बनाया जाता है शुद्ध और सात्विक भोजन
सबसे मुख्य बात यह है कि इस किचन में नशा मुक्त एवं संयम पथ पर चलने वाले ब्रह्माकुमारी संस्था के सदस्य ही भोजन तैयार करते हैं। इस दौरान पूरे समय परमात्मा के गीत चलते रहते हैं। भोजन बनाने के दौरान वहां कोई भी अनावश्यक बात नहीं करता है। सभी सदस्य परमात्मा को याद करते हुए ही भोजन बनाते हैं, ताकि भोजन करने वालों का तन और मन बीमारियों से दूर रहे, शक्ति आए।
किचन में आलू, टमाटर, लौकी और गिल्की सहित सब्जियों की धुलाई तथा काटने का कार्य मशीनों द्वारा किया जाता है। मशीन से ही छिलाई के बाद उन्हें काटा जाता है। इस तरह एक घंटे में 90 किलो सब्जियों की कटाई हो जाती है, जिन सब्जियों को मशीन से नहीं काट सकते हैं, उन्हें सेवाधारी माताएं काटती हैं।
मशीनों से गूथा जाता है आटा
किचन में आटा गूथने के लिए अलग-अलग मशीनें लगी हुई हैं। इसके साथ ही पराठा बनाने के लिए मेगा तवा बना हुआ है, जिस पर एक साथ आठ-दस माताएं-भाई पराठे सेंक सकते हैं। भोजन की पूरी प्रक्रिया के दौरान यहां शुद्ध लाने के लिए बड़े-बड़े एडजास्ट फैन लगाए गए हैं, जो पूरे किचन के तापमान को नियंत्रित रखते हैं।
दो घंटे में ही बन जाता है 40 हजार लोगों का भोजन
किचन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां एक साथ ही 40 हजार लोगों का भोजन केवल दो घंटे में बनाया जा सकता है। इसके लिए बड़ी-बड़ी कड़ाही और तपेलों को आटोमैटिक मूड में लगाया गया है, जो सब्जी पकाने के बाद इन्हें वहीं धुलाई किया जा सकता है। भोजन बनाने के दौरान सभी के लिए सिर पर कैप लगाना अनिवार्य रहता है। साथ ही साफ-सफाई का इतना ध्यान रखा जाता है कि एक मक्खी नहीं मिल सकती है।