उदयपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक गर्भवती महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में जब गंभीर हालत में महिला और नवजात को अस्पताल ले जाया गया तो वहां ताले लगे हुए थे। ऐसे में महिला अपने नवजात के साथ करीब 6 घंटे तक अस्पताल के बाहर ही दर्द से तड़पती रही, लेकिन उपचार नहीं मिला।
जानकारी के अनुसार गोगुन्दा के नांदेशमा गांव में एक गर्भवती महिला को रात के समय प्रसव पीड़ा हुई और उसके परिजन तुरंत उसे लेकर नांदेशमा स्थित राजकीय अस्पताल के लिए रवाना हो गया। हालांकि, बीच रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। गंभीर हालत में महिला और नवजात को अस्पताल लाने पर वहां का मुख्य दरवाजा बंद पाया गया। अस्पताल में न तो कोई चिकित्सक मौजूद था न ही कोई स्टाफ। इस दौरान महिला दर्द से तड़पती रही और लगभग छह घंटे तक अस्पताल के बाहर असहनीय पीड़ा झेलती रही।
ये भी पढ़ें-
बच्चों से दूर हुई मांएं, नहीं मिली उस पार जाने की अनुमति, दोनों देशों की सरकार से लगाई गुहार
गांव की एक महिला ने नवजात की नाल काटी, लेकिन अस्पताल से कोई सहायता नहीं मिली। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश फैल गया और उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों तथा ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस लापरवाही के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर चिकित्सकीय सहायता मिलती तो महिला और नवजात का सुरक्षित इलाज हो सकता है।
ये भी पढ़ें-
राजस्थान पटवारी भर्ती में बढ़ी पदों की संख्या, अब 3727 पदों पर होंगी नियुक्तियां
इस मामले में अस्पताल के चिकित्सक प्रवीण दवे ने बताया कि वे उदयपुर में रहते हैं और उनकी मां की तबीयत खराब है, जिसके कारण अस्पताल में उनके अलावा एक नर्सिंग स्टाफ, एक लैब टेक्नीशियन और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। चिकित्सकों का कहना है कि स्टाफ की भारी कमी के कारण अस्पतालों की हालत बेहद खराब हो गई है और इसे सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।