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Tesu-Jhanjhi: A love story that was extinguished before it could ever blossom—Tesu had set out with his wedding procession.
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VIDEO:टेसू-झांझी: एक ऐसी प्रेम कहानी जो परवान चढ़ने से पहले मिटा दी गई, बारात लेकर निकले टेसू।
बाह। टेसू-झांझी की एक ऐसी प्रेम कहानी है जो महाभारत के युद्ध की पृष्ठ भूमि में परवान चढ़ने से पहले मिटा दी गई। अधूरी प्रेम कहानी की पांच दिवसीय लोक परंपरा के निर्वहन को रविवार की रात बाह, जरार, बिजौली, जैतपुर में टेसू की बारात निकाली गई। बारात में युवा ढोल नगाड़े के साथ टेसू के गीतों पर जमकर झूमे। बारात से लेकर मंडप तक टेसू-झांझी के विवाह को लेकर उत्साह देखते ही बना। गलियों में गूंजे टेसू-झांझी के गीत ब्रज की लोक परंपरा को जीवंत करने वाले रहे। विजय दशमी से शरद पूर्णिमा तक ब्रज के गांवों में टेसू झांझी की लोक परंपरा का निर्वहन होता है। तीन टांग पर टेसू खड़ा होता है, जबकि झांझी छोटी मटकी के आकार की होती है। टेसू अटर करें, टेसू मटर करें, टेसू लई के टरें... जैसे गीत गाते हुए लड़कों की टोलियों ने गांवों में चंदे के लिए घर-घर दस्तक दी थी। नाच मेरी झिंझरिया... जैसे गीतों को गाकर बेटियां हर घर के आंगन को रोशन करने को पहुंची थी। रविवार को शरद पूर्णिमा पर टेसू-झांझी की शादी और अंतिम विदाई की रश्म का निर्वहन किया गया। रामदत्त बघेल, भूपेन्द्र भदौरिया, संजय पांडेय ने बताया कि शनिवार को महिलाओं ने भात से लेकर मंडप में शादी तक की रश्में निभाई हैं। युवकों ने जरार चौराहे से लेकर मंंडप तक टेसू की बारात निकाली है। महाभारत कालीन परंपरा को जीवंत करने का प्रयास है। जिसमें बड़ों ने अपनी भूमिका बढ़ चढ़ कर निभाई है। प्रियंका, खुशबू, सपना, राखी, प्रेमलता, सुमन, रेखा, सीता आदि ने बताया कि लड़कों ने थाली-चम्मच बजाकर टेसू की बारात निकाली, वहीं लड़कियां भी शरमाती-सकुचाती झांझी को विवाह मंडप में लेकर पहुंची। ढोलक की थाप पर मंगल गीतों के साथ टेसू-झांझी का विवाह में सात फेरे पूरे होने से पहले ही लड़कों ने टेसू का सिर धड़ से अलग कर दिया, वहीं लड़कियों ने अपने सिर पर झांझी को रख कर घूम कर उनको अंतिम विदाई दी।
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