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अयोध्या:हनुमानगढ़ी में नमाज-इफ्तार सद्भावना के नाम पर हुई थी, दोबारा संभव नही
हनुमानगढ़ी में नमाज-इफ्तार सद्भावना के नाम पर हुई थी, दोबारा संभव नही
- सीएम योगी के बयान का किया समर्थन, बोले- अदालत के आदेश के बाद 2005 से गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों पर रोक; चढ़ावा प्रकरण पर राजनीति न करने की अपील
अयोध्या: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी में नमाज और इफ्तार को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए दंतधावन कुंड पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी ने कहा कि वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ी परिसर में जो घटना हुई थी, उसके पीछे तत्कालीन महंत ज्ञानदास का उद्देश्य सामाजिक सद्भावना का संदेश देना था, लेकिन उस समय भी इसका व्यापक विरोध हुआ था।
महंत विवेक आचारी ने बताया कि प्रारंभिक योजना हनुमानगढ़ी परिसर में गर्भगृह के निकट रोजा इफ्तार कराने की थी, लेकिन पुलिस-प्रशासन की आपत्ति के बाद कार्यक्रम हनुमानगढ़ी से सटे महंत ज्ञानदास के आश्रम में आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सही प्रश्न उठाया है कि यदि हनुमानगढ़ी में नमाज या इफ्तार कराया जा सकता है, तो क्या जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ कराया जा सकता है। उनके अनुसार उस समय की घटना से बड़ी संख्या में हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं।
महंत विवेक आचारी ने कहा कि वर्ष 2003 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के कार्यकाल में सामाजिक सौहार्द के नाम पर हनुमानगढ़ी में नमाज और इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसका संत समाज के एक बड़े वर्ग ने विरोध किया। बाद में इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के उपरांत वर्ष 2005 में अदालत ने हनुमानगढ़ी परिसर में किसी भी प्रकार की गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया। इसके बाद वहां दोबारा नमाज या इफ्तार जैसे आयोजन नहीं हुए।
राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण पर उन्होंने कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले राम मंदिर निर्माण का विरोध करते थे, वही आज राम मंदिर के पक्ष में खड़े होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सनातन और रामभक्तों के साथ छलावा है।
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