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Video: अयोध्या में पनभरिया पीएचसी का स्टाफ आवास बना खंडहर, चोर उखाड़ ले गए खिड़की-दरवाजे
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनभरिया में डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए बने सरकारी आवास की दुर्दशा शासन-प्रशासन की लापरवाही उजागर कर रही है। अराजक तत्वों ने आवास के खिड़की-दरवाजे, रोशनदान, वॉशबेसिन और लोहे के एंगल तक उखाड़ लिए। अब छत को छोड़कर किसी भी कमरे में दरवाजे-खिड़की नहीं बचे हैं।
पनभरिया निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कमल कुमार तिवारी ने मामले की शिकायत सीएमओ, और तारुन पुलिस से की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई। तत्कालीन सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बलियान ने शिकायत पर स्थलीय निरीक्षण भी किया था, पर हालात जस के तस हैं। कमल कुमार तिवारी ने बताया कि कोई भी कर्मचारी अस्पताल के बगल बने आवास में निवास नहीं करता।
ग्रामीणों के मुताबिक, पनभरिया के पंडित चिंतामणि तिवारी, सुरेंद्रनाथ तिवारी और जगदीश प्रसाद तिवारी ने 1970 में अस्पताल के लिए जमीन दान दी थी। तब यहां अस्थाई अस्पताल चलता था। 2007 में शासन ने पीएचसी।और बगल में स्टाफ आवास बनवाया। निर्माण के कुछ साल बाद ही जब कर्मचारी रहने नहीं आए, तो चोरों ने धीरे-धीरे पूरा आवास उजाड़ दिया।
अस्पताल निर्जन स्थान पर है। बगल में पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्थित है। शाम को अस्पताल बंद होने के बाद आवाजाही थम जाती है, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने आवास को खंडहर बना दिया।
मंगलवार को मौके पर मिले डॉ. अखिलेश तिवारी ने बताया कि वह जुलाई से तैनात हैं और मामला काफी पुराना है। फार्मासिस्ट गोविंद पाण्डेय 2022 से कार्यरत हैं। उनके आने से पहले ही सारा सामान गायब हो चुका था।
आयुष चिकित्सक के सहारे इलाज
पीएचसी पर एक चिकित्सा अधीक्षक का पद सृजित है, लेकिन काफी समय से पद रिक्त होने के कारण हैदरगंज के आयुष चिकित्सक डॉ. अखिलेश तिवारी से हफ्ते में तीन दिन सेवा लेकर मरीजों का इलाज कराया जा रहा है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तारुन के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंशुमान गुप्ता ने बताया कि मामला काफी पुराना है। अस्पताल में बाउंड्री न होने के कारण अराजक तत्व अंदर घुस जाते हैं और अस्पताल को नुकसान पहुंचा देते हैं।
स्थानीय लोगों में रोष है। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। अगर समय रहते स्टाफ की तैनाती और बाउंड्री बन जाती, तो यह नौबत न आती।
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