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VIDEO: आस्था का अद्भुत केंद्र, 190 फीट ऊंचे शिखर वाला श्री कैलाश महादेव मंदिर; सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़
सावन माह की शुरुआत के साथ ही जनपद के ऐतिहासिक श्री कैलाश महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ने लगी है। लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराना यह मंदिर जिले का सबसे ऊंचा शिवालय माना जाता है। 190 फुट ऊंचे शिखर और करीब 100 फुट ऊंचे ठोस गर्भगृह वाला यह मंदिर अपनी भव्यता के साथ धार्मिक मान्यताओं के कारण भी विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि तत्कालीन राजा राय बहादुर दिलसुख राव ने राज्य की सुख-समृद्धि और प्रजा को कष्टों से मुक्ति दिलाने की कामना के साथ इस मंदिर का निर्माण कराया था। विद्वान पंडितों और ज्योतिषाचार्यों की सलाह पर वैदिक विधि-विधान एवं लंबे धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवान शिव के चौमुखी शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह चौमुखी शिवलिंग चारों दिशाओं में रक्षा कवच बनकर भक्तों की रक्षा करता है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करता है। मंदिर की 190 फुट ऊंची भव्य संरचना दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। ऊंचाई देखकर बुजुर्ग श्रद्धालु भले ही सीढ़ियां चढ़ने में संकोच करें, लेकिन भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने से स्वयं को रोक नहीं पाते। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, जबकि सोमवार और श्रावण मास में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक और पूजा करने से भगवान शिव भक्तों के सभी कष्ट दूर कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। श्रावण मास के दौरान मंदिर में रुद्राभिषेक, ग्रह शांति, कालसर्प योग निवारण और महामृत्युंजय जाप कराने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भोलेनाथ के दर्शन और पूजा से मानसिक तनाव दूर होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रावण मास में लाखों श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। महंत धीरेंद्र झा ने बताया कि इस प्रकार का मंदिर सिर्फ नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर है।
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