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VIDEO: गैरशैक्षणिक कार्यों से मुक्ति मिलने पर बढ़ेंगे नवाचार, विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या
परिषदीय विद्यालयों की हालत में पहले की अपेक्षा काफी सुधार हुआ है। संसाधन भी बढ़ाए गए हैं। इससे पढ़ाई का माहौल बेहतर बना है। हालांकि शिक्षकों की कमी और उन्हें गैरशैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालयों में हर विषय और कक्षा के अनुरूप शिक्षक होने चाहिए। पढ़ाई के साथ खेलकूद के भी पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। अगर शिक्षकों से सिर्फ शिक्षण कार्य कराया जाए तो निश्चित ही नवाचारों में भी बढ़ोत्तरी होगी और वे बच्चों को पूरे मनोयोग और रुचिकर ढंग से पढ़ा सकेंगे, जिससे बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा और उनकी मेधा चमकेगी।
इस तरह की बेबाक राय रविवार को अमर उजाला संवाद में शिक्षकों ने रखी। संवाद में नौनिहालों की शिक्षा और नवाचार जैसे मुद्दों पर शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किए। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समर बहादुर सिंह ने कहा, ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाएं कम नहीं है। विद्यालयों में खेलकूद के अवसर तो मिलते हैं, लेकिन पर्याप्त संसाधन और खेल मैदान नहीं होने से दिक्कत आती है। खेलों से बच्चों की रुचि पढ़ाई के प्रति भी बढ़ती है। जिलाध्यक्ष राघवेंद्र यादव बोले कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंसी (एआई) का दौर आ चुका है। ऐसे में नौकरियों का संकट बढ़ेगा। इसीलिए व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
महामंत्री सियाराम सोनकर ने कहा कि अध्यापकों को गैरशैक्षणिक कार्यों में लगाया जाना उचित नहीं है। एक तो पहले से ही विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं है, ऊपर से दूसरे कार्यों में लगा दिए जाने से बच्चों को पढ़ाई का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता है। जगतपुर क्षेत्र के शिक्षक दीपक कुमार और डीह क्षेत्र के शिक्षक नागेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि विद्यालयों में पहले की अपेक्षा संसाधन और सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है। शिक्षक सुनील कुमार यादव और शिव कुमार कहते हैं कि अध्यापक विभिन्न तरीकों से बच्चों में ज्ञान का संचार करते हैं। नवाचार में भी अच्छे प्रयास किए हैं। दूसरे कार्यों का दबाव न हो तो नवाचार बढ़ेंगे।
प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री शैलेश यादव ने कहा कि विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है। हिंदी-अंग्रेजी के शिक्षक गणित-विज्ञान जैसे विषय पढ़ाते हैं। ऐसे में बच्चे भले ही पास होकर चले जाते हैं, लेकिन पढ़ाई में कमजोर होने के कारण आगे कठिनाई होती है। शिवशरण सिंह ने विद्यालयों में बाउंड्रीवाल न होने से आने वाली दिक्कतें उठाईं। खेलकूद को बढ़ावा देने और संसाधन बढ़ाने की बात कही। शिक्षक रूपेश कुमार, मेराज अहमद और उमाशंकर ने नवाचार को महत्वपूर्ण अंग बताया। कहा कि शिक्षक हमेशा नया करने की सोचते हैं, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। सारी जिम्मेदारी शिक्षकों पर थोंपना ठीक नहीं है।
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