हर गरीब के पास कम कीमत में खुद का घर हो इसके लिए पूरे देश में पीएम आवास योजना के तहत कॉलोनी बनाई गई थी। इसी उद्देश्य के साथ दमोह में भी कटनी मार्ग पर समन्ना गांव के नजदीक पीएम आवास योजना के तहत न्यू दमोह कॉलोनी का निर्माण हुआ था। यहां 113 ब्लॉक में बने 1356 आवासों की गुणवत्ता संदेह में आ गई है, क्योंकि इन भवनों का प्लास्टर नीचे गिरने लगा है और बिल्डिंग में ईंटें नजर आने लगी हैं, लेकिन इसके बाद भी इनकी मरम्मत नहीं कराई गई है। जिस एजेंसी ने काम किया था। वह चार साल पहले जा चुकी है और गारंटी पीरियड भी निकल चुका है। ऐसे में अब हितग्राहियों को स्वयं मरम्मत करानी होगी या फिर नगरपालिका के भरोसे बैठना होगा।
8 साल पहले हुई थी शुरुआत
बता दें कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2016 में हुई थी और इसे 2018 में कंप्लीट किया गया था, लेकिन एजेंसी 2021 में यहां से चली गई। जो मरम्मत कराई जानी थी, वह भी नहीं कराई। जब आवास आवंटित किए गए थे, तब ही हितग्राहियों की शिकायत पर कुछ काम कराया था। उसके बाद से आगे किसी तरह का काम नहीं कराया गया। शासन स्तर पर एजेंसी को किए गए भुगतान की जांच बैठ गई। इसके बाद से एजेंसी ने काम बंद कर दिया। यहां तक कि इन घरों में अभी भी पानी की पाइप लाइन के कनेक्शन नहीं हुए हैं और टैंकर से पानी सप्लाई हो रहा है। लोग घरों के सामने पानी की टंकी रखते हैं, नगरपालिका टैंकर के माध्यम से पानी भरती है और लोग इन टंकियों से पानी भरकर उसे चार मंजिला तक भरकर ले जाते हैं। यह समस्या 6 साल से बरकरार है, लेकिन नगरपालिका ने इसका समाधान नहीं किया। अब भवन की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो रहा है। कई जगह प्लास्टर गिर रहा है, लेकिन सुधार कार्य नहीं किया जा रहा है।
बिल्डिंग का आधे से ज्यादा हिस्से का प्लास्टर गिर गया
मुख्य सड़क के बाजू में बने दो ब्लॉक का प्लास्टर झड़ चुका है। कभी भी यहां पर प्लास्टर गिर जाता है, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता है। यहां रहने वाले आजाद खान, पंकज शुक्ला ने बताया कि अब प्लास्टर गिरने लगा है। उनकी बिल्डिंग का आधे से ज्यादा हिस्से का प्लास्टर गिर गया है। ए ब्लॉक के बाजू वाले हिस्से में और बी, सी में भी यही स्थिति है। उसका प्लास्टर भी गिर रहा है। मरम्मत के नाम पर कोई काम नहीं कराया गया है। प्रशांत गुप्ता ने बताया कि आवास मिलने के बाद उसकी एक बार भी मरम्मत नहीं हुई है। यहां तक कि दोबारा देखने के लिए भी कर्मचारी नहीं आए हैं। यहां तक कि एजेंसी ने यहां से अपना स्टाफ हटा लिया है। साइट पर कंपनी का कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं हैं।
चार साल से काम बंद है
नगर पालिका के उपयंत्री और आवास प्रभारी अशोक पाठक का कहना है कि इस मामले की जांच चल रही है। एजेंसी जा चुकी है। अब यह मामला भोपाल का है। इसमें हम कुछ नहीं कह सकते हैं। मरम्मत की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। आवासों का आवंटन 2018 में हो गया था।
दीवारों से गिरा प्लास्टर