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पीने को पानी नहीं...नहा लेंगे तो पीएंगे क्या?, सुनिए इनका दर्द साथ ही देखिए ये तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 08 Jun 2019 08:27 AM IST
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घर से कई किलोमीटर दूर एक कुएं से पानी लाते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
अरे भइया...यहां बड़ी मुश्किल से पीने का पानी मिलता है, अगर नहा लेंगे तो पीने के लिए पानी ही नहीं बचेगा। बुंदेलखंड में पानी को लेकर मचे हाहाकार के बीच एक ग्रामीण की बातें सुनकर आंख छलक आएगी। यहां के लोग पीने के पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। इतना ही नहीं तीन से चार दिन तक लोग बस इसलिए नहीं नहाते कि पीने का पानी खत्म हो जाएगा। पानी की भयंकर समस्या से जूझ रहे लोग गांव से कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लेकर आते हैं। ग्रामीणों की पानी के लिए ये जद्दोजहद और दर्द किसी को भी रुला सकता है।
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पानी भरने के लिए समूह में जाती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट जिले में पाठा क्षेत्र के आदिवासी इलाके के गांवों में पेयजल का संकट आलम यह है कि पीने के लिए पानी नहीं है। गांव में बने कुएं पूरी तरह से सूख गए हैं। हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा। जिससे यहां के आदिवासी सूदुर क्षेत्र मे बने जल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
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लोगों को चिढ़ाता कुंए का ये नाम मात्र का पानी
- फोटो : अमर उजाला
मानिकपुर विकास खंड के अमचुर नेरूआ ग्राम पंचायत में तीन मजरों में पानी के लिए हाहाकार मची हुई है। यहां के ग्रामीण जंगल से पानी लाने को मजबूर हैं। इस पंचायत में आठ हैंडपंप व तीन कुएं हैं। हैंडपंपों से पानी नहीं निकल रहा। कुएं सूख गए हैं।
पानी के लिए लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
अमचुर नेरूआ गांव के खदरा सोसायटी इस मजरे में एक हजार की आबादी निवास करती है। जिसके लिए दो हैंडपंप है। जिनमें से एक हैंडपंप चल रहा है। इस गांव में एक कुआं है जो सूखने की कगार पर है।
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गांव से दूर एक कुएं से पानी लाती महिला
- फोटो : अमर उजाला
मजरा नेरूआ में लगभग पचास परिवार रहते हैं। पानी पीने के लिए मात्र दो हैंडपंप है। जिसमें एक खराब है। कुएं का जलस्तर गिर जाने से नाममात्र का पानी दिख रहा है। ग्रामीण पानी भरने के लिए जान जोखिम में डाल रस्सी के सहारे उतकर पानी निकालते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि एक हैंडपंप के सहारे यहां के निवासी पानी भर रहे हैं।
