बात 1 अगस्त 1997 की है, लखनऊ में हुसैनगंज के दिलीप होटल में सुबह करीब 9:30 बजे चार युवकों ने दाखिला लिया। किसी को नहीं पता था कि अगले ही पल यूपी में सबसे चर्चित होटल के तौर पर दिलीप की पहचान बन जाएगी। क्योंकि इन्हीं में से एक युवक पूर्वांचल का सबसे बड़ा डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला था।
पूर्वांचल के इस कुख्यात बदमाश ने लखनऊ में बरसाईं थी गोलियां, चिल्लाकर कहा था 'मैं हूं श्रीप्रकाश शुक्ला'
होटल के अंदर कमरा नंबर 102 में उस वक्त श्रीप्रकाश शुक्ला ने लगभग 50 राउंड के आसपास बर्स्ट फायरिंग की थी। इसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इन्हीं घायलों में से एक गोरखपुर के निवासी भानु प्रकाश मिश्रा भी थे। इन्होंने उस सुबह की कहानी बयां की तो एक बार यकीन ही नहीं हुआ कि हकीकत में भी ऐसा हुआ है।
भानु ने बताया कि सुबह के वक्त लगभग पौने दस बजे होटल दिलीप में चार युवकों ने दाखिला लिया। इनमें से एक औसत कद का गठीला युवका था और साथ में कुछ और साथी थे। इनमें से दो रिसेप्शन के काउंटर पर बैठ गए जबकि दो सीढ़ियों के रास्ते कमरा नंबर 102 के पास पहुंच गया। उनमें से वही गठीला युवक कमरे के दरवाजे को धक्का देकर खोला और बीचों बीच खड़ा होकर चिल्लाया कि 'मैं श्रीप्रकाश शुक्ला हूं'।
बताया कि इसी के साथ उसने एके 47 (स्वचलित राइफल) से ताबडतोड़ फायरिंग शुरू कर दी। साथ खड़े दूसरे युवक ने भी पिस्तौल निकाल कर गोली चलाना शुरू कर दिया। गोलियों की आवाज से पूरा होटल व आसपास का इलाका दहल उठा। इस घटना में मुझे, उमाशंकर सिंह, रमेश जायसवाल और विवेक शुक्ला को गोली लगी थी। हम चारों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सभी गोरखपुर के ही रहने वाले थे। विवेक की मेडिकल कॉलेज लखनऊ में मौत हो गई थी। उसके शरीर से ऑपरेशन कर लगभग 30 गोलियां निकाली गई थीं। यह घटना ठेकेदारी के विवाद को लेकर हुई थी।
घटना के बाद लगभग तीन वर्षों तक भानु प्रकाश मिश्रा इलाज चला। उन्होंने बताया कि पूरी फिल्मी तर्ज पर गोलीबारी को अंजाम दिया गया था। जब श्रीप्रकाश सीढ़ियों पर चढ़कर ऊपर आ रहा था, उसी वक्त सोफे पर बैठे दोनों युवकों ने हाथों में पिस्टल लेकर रिसेप्शनिस्ट पर तान दी थी। ऊपर गोलियां चलती रही और नीचे होटल के स्टाफ बंदूक की नोंक पर थे।
(नोटः पूरी घटना भानु प्रकाश मिश्रा को उनके सही होने पर तत्कालीन पुलिस की टीम, होटल के स्टाफ, उनके जानने वाले व अन्य लोगों ने बताई थी, गंभीर रूप से घायल भानु का वर्षों तक अस्पताल में इलाज चला था। ये भी कहा जाता है कि भानु प्रकाश मिश्र को लक्ष्य करके ही गोली चलाई गई थी।)
