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मनीष हत्याकांड: सीबीआई के सामने गवाहों ने बयां की पुलिस की बर्बरता, बोले- बंदूक की बट लगते ही फर्श पर गिर गए थे मनीष, फिर नहीं उठे...

रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 09 Jan 2022 11:25 AM IST
मनीष गुप्ता हत्याकांड।
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कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता हत्याकांड में गवाहों ने सीबीआई के सामने जगत नारायण सिंह और उसकी टीम की बर्बरता को सिलसिलेवार बयान किया है। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में पेश अपनी चार्जशीट में जगत नारायण सिंह और उसकी टीम की निरंकुशता को क्रमवार दर्ज किया है। इसी आधार पर सीबीआई ने आरोपी छह पुलिसकर्मियों पर दर्ज हत्या के आरोप को सही पाया। इन्हीं बयानों पर अन्य गंभीर धाराओं को भी केस में बढ़ाने का आधार मिला।  

हत्याभियुक्त इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह ने भांजे को फोन करने से खफा होकर मनीष को दो-तीन थप्पड़ जड़ दिए थे। होटल कृष्णा पैलेस में 27 सितंबर की रात, बंद कमरे में जो कुछ हुआ, चश्मदीद गवाहों ने उसे सीबीआई के सामने उगल दिया। बताया कि थप्पड़ खाकर लड़खड़ाया मनीष, संभलता इससे पहले ही एसआई अक्षय मिश्रा ने उसकी गर्दन पर हाथ मारते हुए, बाहर की तरफ खींचा था। इसी बीच एक अन्य पुलिस वाले ने बंदूक की बट से मनीष के सिर पर वार किया था। इसके बाद मनीष फर्श पर गिर गया और फिर होश में नहीं आया।
मनीष हत्याकांड: सीसीटीवी में कैद हुए हत्यारोपी पुलिस।
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इसके अलावा अन्य पुलिस वालों ने भी मनीष और उसके दोनों दोस्तों की जमकर पिटाई की थी। सबसे पहले हरबीर को अक्षय मिश्रा ने थप्पड़ मारा था। इसके बाद उसके साथ खड़े आरक्षी ने हरबीर को मारते हुए कमरे से बाहर धकेल दिया था। इस दौरान, जगत नारायण सिंह, मनीष और हरबीर को लगातार गालियां देते हुए, थाने ले जाकर पिटाई की धमकी दे रहा था।  

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चार्जशीट में मुख्य गवाह होटल कृष्णा पैलेस के कर्मचारी आदर्श को बनाया है। दूसरे गवाह के तौर पर मनीष के दोस्त हरबीर का नाम है। चार्जशीट के मुताबिक, घटना वाली रात पुलिस की टीम होटल के कमरे में पहुंची तो हरबीर ने दरवाजा खोला। इंस्पेक्टर समेत अक्षय मिश्रा ने उससे नाम, पता और गोरखपुर आने का कारण पूछा। हरबीर ने खुद को चंदन का दोस्त बताते हुए, उससे मिलने गोरखपुर आने की बात कही। इस पर अक्षय मिश्रा ने चंदन का फोन नंबर लेकर फोन किया। इस दौरान कमरे में इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मी उनके बैग की तलाशी ले रहे थे। चंदन से अक्षय मिश्रा ने हरबीर की जानकारी ली। चंदन द्वारा पुष्ट करने पर अक्षय मिश्रा ने फोन रख दिया।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड।(घटना वाली रात होटल के कमरे में पूछताछ करते आरोपी पुलिसकर्मी)
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हरबीर से पहचान पत्र मांगने पर, उसने सुबह कागजों की जांच करने और रात होने की बात कही। इसी से नाराज होकर इंस्पेक्टर के उकसाने पर अक्षय मिश्रा ने हरबीर को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया। साथ में मौजूद तीसरा पुलिसकर्मी भी हरबीर को मारने लगा। इसी बीच मनीष ने अपने भांजे को लखनऊ फोन मिला दिया। फोन लगाकर बात करवाने के दौरान हरबीर को पुलिस वाले कमरे से बाहर ले गए। होटल कर्मचारी आदर्श पुलिस के साथ शुरू से कमरे में मौजूद था। आदर्श ने अपने बयान में पुलिस की बर्बरता की पूरी कहानी बयान की है। इसे चार्जशीट में सीबीआई ने केस का मुख्य बिंदु बनाया है।

आदर्श ने बताया है कि घटना के बाद होटल के कमरे में जिस जगह खून गिरा था (बाथरूम और कमरे से बाहर निकलने वाले दरवाजे के पास फर्श पर), उसी जगह पर मनीष चोट लगने के बाद गिरे थे। इसके बाद, उन्हें होश नहीं आया था। पुलिस वाले मनीष को बेसुध हालत में ही टांगकर बाहर लेकर गए थे।
मनीष गुप्ता हत्याकांड की सीसीटीवी फुटेज।
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होटल में ही हो गई थी मनीष की मौत

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि चार्जशीट में मनीष की मौत का समय और स्थल होटल का कमरा बताया गया है। इसकी पुष्टि निजी अस्पताल के बीएमएस चिकित्सक मौर्य ने भी सीबीआई के सामने की है। उन्होंने अपने बयान में बताया कि मनीष जब अस्पताल लाए गए थे, उस वक्त उनकी नब्ज नहीं चल रही थी। इसके बाद तकरीबन डेढ़ घंटे तक मनीष को थाने की गाड़ी में रखकर रामगढ़ताल थाने की तत्कालीन पुलिस की टीम इधर-उधर शहर में घूमती रही।
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मनीष हत्याकांड में जांच करती एसआईटी कानपुर।
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कई बिंदुओं पर एसआईटी की जांच को बनाया पक्ष

सीबीआई ने कई बिंदुओं पर एसआईटी की जांच को ही पक्ष बनाया है। मसलन, घटना वाली रात रामगढ़ताल थाने से मेडिकल कॉलेज ले जाने वाली, पुलिस टीम का बयान एसआईटी ने दर्ज किया था। सीबीआई ने पुलिस की टीम से घटना के संबंध में बयान नहीं लिया। एसआईटी में उपनिरीक्षक अजय राय के बयान को ही सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। इसके मुताबिक, रात एक बजकर 12 मिनट पर, तत्कालीन इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने फोन कर रात्रि कालीन थाना प्रभारी अजय राय को थाने बुलाया। वह रात एक बजकर 40 मिनट पर थाने पहुंचे। इसके बाद वह थाने से मेडिकल कॉलेज के लिए निकल जाते हैं। ऐसे में निजी अस्पताल से लेकर रामगढ़ताल थाने आने और वापस मेडिकल कॉलेज जाने में अजय राय को कुल एक घंटे से अधिक का समय लग गया। एसआईटी की जांच में इस बयान को मजबूत आधार बनाया गया था।
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