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बाढ़ से हाहाकार: 23 साल बाद दिखा ऐसा मंजर, हर तरफ नजर आ रही बर्बादी, देखें तस्वीरें

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 06 Sep 2021 12:12 PM IST
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Flood like atmosphere in Gorakhpur after 23 years
गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले में राप्ती और आमी नदी की बाढ़ से वैसे तो हर साल गोरखपुर और आसपास के इलाके प्रभावित होते हैं, लेकिन इस साल हालात ज्यादा खराब हैं। शहर से लगे बाघागाड़ा गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने 23 साल बाद ऐसी बर्बादी देखी है। गांव में 10 दिनों से आमी नदी का पानी भरा है। फसलें बर्बाद हो गई हैं। उनवल मार्ग पर पानी बह रहा है। घरों में पानी भर जाने से लोग इधर-उधर शरण लिए हैं। लोगों का कहना है कि पानी तो लगभग हर साल आता है लेकिन बाढ़ से ऐसी बर्बादी वर्ष 1998 में ही दिखी थी। अगस्त के आखिरी सप्ताह में ही जिले से बहने वाली प्रमुख नदियां राप्ती और सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। इसके साथ ही आमी, रोहिन और गोर्रा का भी जलस्तर बढ़ने लगा था। इससे नदियों के किनारे बसे गांवों में पानी भर गया। फसलें जलमग्न हो चुकी हैं और लोगों के घरों में भी पानी भरा है। लोग इधर-उधर रहकर पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं।
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Flood like atmosphere in Gorakhpur after 23 years
गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
सदर तहसील का बाघागाड़ा गांव भी आमी नदी की बाढ़ से प्रभावित है। गांव के अधिकतर लोग बाघागाड़ा-उनवल मार्ग के किनारे शरण लिए हैं। रविवार को इस सड़क के किनारे पेड़ की छांव में कुछ लोग बैठकर हालात पर चर्चा कर रहे थे। 70 वर्षीय लालजी ने बताया कि वर्ष 1998 की बाढ़ में इस सड़क पर पानी की तेज धार बह रही थी। वैसे हर साल बरसात में पानी आता है, लेकिन खास दिक्कत नहीं होती है। फसलों का भी कम नुकसान होता है, लेकिन इस साल 10 दिन से पानी भरा हुआ है। 80 वर्षीय किशोर ने बताया कि इस इलाके के लोग धान व सब्जी की खेती करते हैं। इस साल की बाढ़ में फसलें बर्बाद हो गईं हैं। खेतों व घरों में पानी भरने के चलते काफी दिक्कत हो रही है।
 
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
नहीं मिली कोई सुविधा
इसी गांव की बित्तन देवी, रौशनी, जसवंती आदि महिलाओं का कहना था कि चारों तरफ पानी भरा होने के कारण सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं को हो रही है। घर से किसी तरह निकलकर सड़क पर पहुंची हैं। यहां किसी न किसी के बरामद में समय गुजारा जा रहा है। नित्यक्रिया के लिए भी कहीं जगह नहीं है। बच्चों की निगरानी करनी पड़ रही है। प्रशासन की तरफ से अब तक कोई खोज खबर लेने नहीं पहुंचा है। महिलाओं का आरोप है कि अभी तक उन्हें राहत सामग्री नहीं उपलब्ध कराई गई है, जबकि उनका गांव बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है।
Flood like atmosphere in Gorakhpur after 23 years
गुड्डी व रामदास - फोटो : अमर उजाला।
रुकने के लिए कोई इंतजाम नहीं
बाघागाड़ा की बाढ़ पीड़ित गुड्डी बताती हैं कि बाढ़ का पानी घर में भरा है, फसल डूब गई है। पूरा परिवार सड़क पर वक्त गुजार रहा है। मवेशियों को भी यहीं लाकर बांधा है। अभी तक कहीं से कोई मदद नहीं मिली है। प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के रुकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है।
 
प्रशासन ने नहीं ली खोज-खबर
बाघागाड़ा के बाढ़ पीड़ित रामदास ने बताया कि इस बार की बाढ़ ने सबसे अधिक नुकसान फसलों को पहुंचाया है। धान की फसल चौपट हो गई है। कोरोना के चलते पहले ही रोजगार प्रभावित था, अब खेती भी बर्बाद हो गई। प्रशासन ने भी खोज-खबर नहीं ली। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा बढ़ती जा रही है।
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रूदल यादव व झीनक निषाद। - फोटो : अमर उजाला।
बाढ़ में रोजी-रोटी का संकट
बाघागाड़ा के बाढ़ पीड़ित रूदल यादव ने बताया कि इस बार धान की फसल अच्छी थी, लेकिन अचानक आमी नदी के पानी में डूब गई। पानी सड़क के ऊपर से बहने लगा। इससे सब परेशान हैं। लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। प्रशासन की तरफ से कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
 
घर गिर गया, सड़क पर शरण
बाघागाड़ा के बाढ़ पीड़ित झीनक निषाद ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों की पीड़ा कोई देखने-सुनने वाला कोई नहीं है। मेरा घर गिर गया, परिवार समेत सड़क के किनारे सामान रखकर शरण लिए हैं। कोई कर्मचारी झांकने भी नहीं आया। शायद प्रशासन की नजर में यह गांव बाढ़ प्रभावित नहीं होगा, इसीलिए कोई मदद नहीं मिल रही है।
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