दूसरी लहर में कोरोना वायरस ने मरीजों के फेफड़ों पर सीधा हमला बोला। अप्रैल-मई में संक्रमण के चरम पर रहे 52 दिनों में एसएन मेडिकल कॉलेज में 229 मौतें हुई। वायरस ने 96 फीसदी मरीजों के 80 फीसदी तक फेफड़े खराब कर दिए थे। इनको आईसीयू में भी बचाया नहीं जा सका। एसएन मेडिकल कॉलेज के डाटा प्रभारी डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि एक अप्रैल से 21 मई तक 229 मरीजों की मौत हुई, इसमें 184 आगरा के और बाकी अन्य जिलों के थे। इन सभी में एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) पाया गया। फेफड़ों का बुरा हाल था, ये 50 से 80 फीसदी तक खराब हो चुके थे। इनको तत्काल हाई फ्लो ऑक्सीजन दी गई, हालत में सुुधार न होने पर आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी।
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कोरोना वायरस: एसएन में सामने आई मरीजों की मौत की चौंकाने वाली वजह, 80 फीसदी तक खराब मिले फेफड़े
Fri, 04 Jun 2021 09:01 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 04 Jun 2021 09:01 AM IST
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एसएन मेडिकल कॉलेज का कोविड वार्ड
- फोटो : अमर उजाला
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वेंटिलेटर
- फोटो : amar ujala
गंभीर हालत में आए मरीज :डॉ. जीवी सिंह
चेस्ट फिजीशियन डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि अधिकांश मरीज देर से भर्ती होने आए, इनकी हालत नाजुक थी, फेफड़ों में गंभीर निमोनिया होने से सांस उखड़ रही थी, कइयों को सीधे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया।
चेस्ट फिजीशियन डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि अधिकांश मरीज देर से भर्ती होने आए, इनकी हालत नाजुक थी, फेफड़ों में गंभीर निमोनिया होने से सांस उखड़ रही थी, कइयों को सीधे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया।
एसएन मेडिकल कॉलेज के वाह्य रोग विशेषज्ञ डॉ. अजीत सिंह चाहर
- फोटो : अमर उजाला
इन्फेक्शन का रहता है खतरा : डॉ. अजित चाहर
संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. अजित चाहर ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा रहता है। जो लोग आईसीयू में रहे हैं और मधुमेह, सांस रोगी हैं उनको दवाएं बंद नहीं करनी हैं। फेफड़ों की व्यायाम और प्रोटीनयुक्त भोजन बेहद जरूरी है।
संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. अजित चाहर ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा रहता है। जो लोग आईसीयू में रहे हैं और मधुमेह, सांस रोगी हैं उनको दवाएं बंद नहीं करनी हैं। फेफड़ों की व्यायाम और प्रोटीनयुक्त भोजन बेहद जरूरी है।
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
एसएन में मृतक
एएसएन मेडिकल कॉलेज में 52 दिन में मृत 229 लोगों में से आगरा के 184, मथुरा के 14, फिरोजाबाद के 10, एटा के 4, हाथरस के 4, मैनपुरी के 2, कन्नौज के 2 और अलीगढ़, बुलंदशहर, दिल्ली, इटावा, फर्रुखाबाद, गोरखपुर, कानपुर, लखीमपुर, शाहजहांपुर के एक-एक मृतक रहे।
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आगरा में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में गुरुवार को 25 नए मरीज मिले थे। एक और संक्रमित की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या अब 423 हो गई। जिले में 228 एक्टिव केस हैं। 24 घंटे में 59 मरीज ठीक हुए हैं। पिछले सप्ताह संक्रमण में कमी आई थी। रोज 12 से 15 मरीज मिल रहे थे। जानकारों का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू खत्म होने के बाद बाजारों में लापरवाही बढ़ने से संक्रमण बढ़ रहा है। जिला प्रशासन ने लोगों से एहतियात बरतने की अपील करते हुए कहा कि अभी संक्रमण में कमी आई है खत्म नहीं हुआ। लोग कोविड गाइड लाइन का कड़ाई से पालन करें। बार-बार हाथ धोये, मास्क पहनें और टीकाकरण कराएं। गुरुवार को 24 घंटे में 8320 लोगों की जांच में 25 नए मरीज मिले। 59 मरीज ठीक भी हुए हैं। अब संक्रमितों का आंकड़ा 25594 पहुंच गया है। जिनमें कुल 24943 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। मरीजों के स्वस्थ होने की दर 97.46 फीसदी है।
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