कोरोना संक्रमण ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। अपनों के खोने का दर्द है तो रोजीरोटी का संकट सामने है। घर का मुखिया खो दिया। अब घर में कोई कमाने वाला नहीं है। रोज के सामान्य खर्चे तक पूरे नहीं हो रहे। रिश्तेदार सहारा बने हैं। लेकिन एक परिवार को शहर से गांव लौट जाना पड़ा। दूसरे परिवार में मां शिक्षामित्र हैं लेकिन दस हजार के मानदेय में चार लोगों के परिवार के भरण पोषण में मुश्किलें आ रही हैं। दोनों परिवारों के मुखिया ने चुनाव में ड्यूटी की थी, परिवारों के सदस्यों का कहना है कि इसी दौरान संक्रमित हुए। एक परिवार में रुंधे हुए गले से बेटी बोली, चुनाव ड्यूटी में नहीं जाते तो पापा हमारे साथ होते। अगली स्लाइड में पढ़िए परिवारीजनों का दर्द...
अपनों के खोने का दर्द: कोरोना ने छीन लीं परिवारों की खुशियां, घर के मुखिया का निधन, आर्थिक संकट में परिवार
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सुरेश चंद बघेल के बड़े बेटे विवेक बघेल (14 वर्ष) ने बताया कि वह बोदला में रहते थे। परिवार में मां कमलेश के अलावा एक बड़ी बहन आसीन बघेल (16 वर्ष) और छोटी बहन पल्लवी (11 वर्ष) हैं। तीनों भाई-बहन शहर में ही पढ़ते थे। पिता की मौत के बाद परिवार अब खेरागढ़ के गांव चीत में रह रहा है। विवेक ने बताया कि 14 अप्रैल को पिताजी चुनाव ड्यूटी के लिए जा रहे थे तो मां ने कहा कि कोरोना फैला हुआ हैं, जरा संभल कर रहना। चुनाव ड्यूटी से लौटने पर उनको बुखार आ गया। दो दिन हमने डॉक्टर से दवा ली थी, तबियत ज्यादा खराब होने पर अस्पताल में ले गए, किसी जगह भर्ती नहीं किया गया। उनकी सांस उखड़ती गई और 25 अप्रैल को उन्होंने दम तोड़ दिया।
प्राथमिक विद्यालय वमनपुरा, अकोला में कार्यरत शिक्षामित्र प्रदीप कटारा (43 वर्ष) भी पंचायत चुनाव की ड्यूटी के बाद बीमार हो गए थे। उनमें कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। विम्स में भर्ती कराया गया और 26 अप्रैल को कोरोना से उनकी मृत्यु हो गई। परिवार में चार बेटियां हैं। बड़ी बेटी कृति (16 वर्ष) का कहना है कि पापा पंचायत चुनाव की ड्यूटी में नहीं जाते तो आज जिंदा होते। तीन और बेटियां मुस्कान (14 वर्ष), वंशिका (12 वर्ष) और मायरा (दो वर्ष) हैं। चारों बेटियां प्रदीप कटारा की याद में गुमसुम रहती हैं। प्रदीप गांव वमनपुरा में ही रहते थे। उनकी मृत्यु के बाद परिवार के भरण पोषण का संकट आ गया है। पत्नी जयश्री भी शिक्षामित्र हैं। बोलीं, 10 हजार रुपये के मानदेय से चार बेटियों को पढ़ाना और बाकी जिम्मेदारी उठाना मुश्किल है।
टेट उत्तीर्ण है जयश्री, सहायक अध्यापिका बनाएं
प्रदीप कटारा की पत्नी जयश्री बीटीसी और टेट उत्तीर्ण हैं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ उनको सहायक अध्यापिका की नौकरी दिलाने के लिए प्रयासरत है। जिलामंत्री बृजेश दीक्षित मांग की है कि बेटियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सरकार उठाए। शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र छौंकर ने भी सरकार से उनको नौकरी देने की मांग की है।
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