उत्तर प्रदेश के आगरा जिले का कोरथ गांव वीर सपूतों की जन्मभूमि है। यहां के कई परिवार सेना से जुड़े हैं। लड़ाई चाहे चीन से हो या फिर पाकिस्तान से। यहां के वीर सपूतों ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं। इनमें नायब सूबेदार लायक सिंह की वीरगाथा सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है। लायक सिंह देश की रक्षा करने के जुनून में पुलिस की नौकरी छोड़ सेना में भर्ती हुए थे। वर्ष 1999 में कारगिल जंग में दुश्मन के छक्के छुड़ाकर अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी याद में गांव में शहीद स्मारक बनवाया गया है, जहां शहीद की प्रतिमा स्थापित है। परिवार वाले उनकी भगवान की तरह पूजा करते हैं। अगली स्लाइड्स में वीर सपूतों की वीरगाथाएं ....
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कारगिल विजय दिवस: यहां भगवान की तरह होती है शहीद की पूजा, परिजन रोज चढ़ाते हैं पुष्प
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 25 Jul 2021 12:03 AM IST
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कारगिल शहीद लायक सिंह की पूजा करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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कारगिल शहीद नायब सूबेदार लायक सिंह
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कोरथ गांव के अवधेश सिंह भदौरिया बचपन में शहीद लायक सिंह के साथ खेले-कूदे, पढे़ और उनके साथ ही सेना में भर्ती हुए थे। अवधेश सिंह ने बताया कि वर्ष 1965 और 1971 की लड़ाई में क्षेत्र के शहीदों की वीरगाथाओं ने सेना में भर्ती होने के लिए जुनून पैदा किया था। लायक सिंह पढ़ाई में होशियार थे और कक्षा में अव्वल आते थे। सेना में भर्ती हुए।
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फौजी बनने के लिए दौड़ लगाते युवा
- फोटो : अमर उजाला
कारगिल जंग में बहादुरी से लड़कर शहीद हुए लायक सिंह गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए। पाकिस्तान, चीन की जंग के दौरान उन्होंने अपने साथियों को सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया था। शहीद के भाई सतेंद्र सिंह लायक सिंह से जुड़ी यादों को साझा कर बोले कि इटावा में पुलिस में भर्ती होने के लिए घरवालों ने भेज दिया था। भर्ती होने के बाद यह कहकर पुलिस की नौकरी छोड़ दी कि सेना में भर्ती होकर पाकिस्तान और चीन को सबक सिखाना है। शहीद लायक सिंह की भतीजी प्रगति और भतीजे सचिन ने सेना में जाने की ख्वाहिश जाहिर की।
शहीद जितेंद्र सिंह चौहान की प्रतिमा
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वीरनारी ने बनवाया शहीद जितेंद्र सिंह का स्मारक
फतेहाबाद के टीकत खंडेरपुरा निवासी जितेंद्र सिंह चौहान की शहादत को आज भी पूरा गांव याद करता है। पांच पैरा बिग्रेड के जवान जितेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना से जमकर लोहा लिया और 21 जुलाई, 1999 को शहीद हो गए। गांव में शहीद का स्मारक बनाने के लिए जमीन आवंटित करने की बात सरकार ने कही थी, लेकिन जमीन का आवंटन न होने पर शहीद की पत्नी ने अपने खर्चे पर स्मारक बनवाया। इसका अनावरण 28 दिसंबर, 2000 को किया गया। फतेहाबाद-बाह रोड से गांव की ओर जाने वाले मार्ग को शहीद जितेंद्र सिंह चौहान मार्ग दिया गया। मार्ग भी इस समय क्षतिग्रस्त अवस्था में है।
फतेहाबाद के टीकत खंडेरपुरा निवासी जितेंद्र सिंह चौहान की शहादत को आज भी पूरा गांव याद करता है। पांच पैरा बिग्रेड के जवान जितेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना से जमकर लोहा लिया और 21 जुलाई, 1999 को शहीद हो गए। गांव में शहीद का स्मारक बनाने के लिए जमीन आवंटित करने की बात सरकार ने कही थी, लेकिन जमीन का आवंटन न होने पर शहीद की पत्नी ने अपने खर्चे पर स्मारक बनवाया। इसका अनावरण 28 दिसंबर, 2000 को किया गया। फतेहाबाद-बाह रोड से गांव की ओर जाने वाले मार्ग को शहीद जितेंद्र सिंह चौहान मार्ग दिया गया। मार्ग भी इस समय क्षतिग्रस्त अवस्था में है।
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कारगिल शहीद श्यामवीर सिंह की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
कारगिल में शहीद हुए थे श्यामवीर
ग्राम पंचायत के मजरा नगला जयराम निवासी श्यामवीर सिंह चाहर कारगिल में दुश्मन से लड़ते-लड़ते 10 जुलाई, 1999 को वीरगति को प्राप्त हुए। श्यामवीर सिंह चाहर 17 जाट रेजीमेंट के जवान थे।
ग्राम पंचायत के मजरा नगला जयराम निवासी श्यामवीर सिंह चाहर कारगिल में दुश्मन से लड़ते-लड़ते 10 जुलाई, 1999 को वीरगति को प्राप्त हुए। श्यामवीर सिंह चाहर 17 जाट रेजीमेंट के जवान थे।