शारदीय नवरात्र के पहले दिन मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ा। सुबह से ही हाथों में पूजा की थाली लिए श्रद्धालु मंदिरों के लिए निकल पड़े। घंटे और घड़ियालों की धुन के बीच मंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। घर-घर में मां की चौकी सजाई गई। विधि विधान से भक्तों ने मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप शैलपुत्री की पूजा अर्चना कर जयकारे लगाए। माता रानी के मंगला दर्शन के लिए अलसुबह तीन बजे से ही भक्तों की टोलियां मां के दरबार की ओर जाती दिखाई दीं। मां राजराजेश्वरी कैलादेवी मंदिर व श्रीमाता वैष्णोदेवी धाम पर चार बजे भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई थी। हर भक्त मंदिर के बाहर खड़े होकर पट खुलने का इंतजार कर रहा था। साढ़े चार बजे पट खुलते ही माता रानी के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजने लगा। सुबह आरती के साथ ही मां के दर्शन का दौर देर रात तक जारी रहा।
नवरात्र 2021: 'भाव का भोग' लगाकर भक्तों ने की आराधना, नवरात्र में आस्था का केंद्र रहता है कैला देवी व मां वैष्णोदेवी धाम
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मां राजराजेश्वरी कैलादेवी मंदिर, उसायनी स्थित श्रीमाता वैष्णोदेवी धाम के साथ मोहल्ला कोटला स्थित दुर्गा माता मंदिर, कोटला रोड पथवारी माता मंदिर, नगला करन सिंह स्थित पथवारी माता, हनुमानगंज स्थित बैलोन वाली माता मंदिर के साथ अन्य मंदिरों पर भी भक्तों की भीड़ देखने को मिली। शिकोहाबाद के काली देवी मंदिर, पथवारी माता मंदिर, मेलवाला बाग स्थित काली मां के मंदिर, रोडवेज बस स्टैंड स्थित माता मंदिर पर सुबह से लेकर शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रही। जसराना के मां कामाख्या धाम, विंध्यवासिनी धाम, बाजार वाले हनुमान मंदिर, फरिहा रोड के पथवारी माता मंदिर, गौ सेवा शक्ति धाम पटीकरा के साथ पाढ़म, एका, मुस्तफाबाद, फरिहा के देवी मंदिरों में लंबी-लंबी कतारें दिखाई दीं।
मंदिरों के बाहर था मेले जैसा नजारा
कोविड के कारण भले ही प्रशासन ने रामलीला महोत्सव के आयोजन की अनुमति न दी हो। लेकिन नवरात्र के प्रथम दिन मां राजराजेश्वरी मंदिर के बाहर बृहस्पतिवार को मेले जैसा दृश्य दिखाई दिया। वैष्णोदेवी मंदिर के बाहर भी मेले जैसा माहौल दिखाई दे रहा था।
फिरोजाबाद और टूंडला के बीच एनएच-टू पर स्थित मां वैष्णो देवी धाम नवरात्र में आस्था का केंद्र बना रहता है। जो भक्तजन मां वैष्णो देवी नहीं जा पाते हैं, वो भक्त गुफा में होते हुए मां वैष्णो के दरबार में पहुंचते हैं। नवरात्र के दिनों में दूर-दराज से हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
मंदिर ट्रस्ट के ललितेश जैन बताते हैं कि यह मंदिर चार बीघा क्षेत्रफल में बना है। मंदिर को वैष्णो देवी जैसा रूप दिया गया है। मंदिर में बनी गुफा और मातारानी का स्वरूप भक्तों को आकर्षित करता है। गुफा की तरफ जाने वाले रास्ते पर महादेव और हनुमानजी का मंदिर भी है। भक्त दंडौती लगाते हुए आते हैं। मनौती पूरी होने नेजा चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मंदिर की नींव वर्ष 2004 में रखी गई थी। 2010 में प्राण प्रतिष्ठा हुई। मंदिर में नौ देवी के मंदिर बने हैं। पंचमुखी हनुमानजी का मंदिर है। अष्ठभुजादेवी का मंदिर है।
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