पैसे लेकर टिकट नहीं दिया। महिला सीट पर पुरुष बैठे हुए हैं। मनचले महिलाओं से अनुचित व्यवहार कर रहे हैं। उन पर अंकुश लगाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ये तस्वीर हैं आगरा शहर में सिटी बस की। अमर उजाला की महिला रिपोर्टर ने गुरुवार को शहर में सिटी बस से सफर कर आधी आबादी के लिए सुरक्षा और सुविधाओं का जायजा लिया तो यह हालात सामने आए। ऐसे ही हालात अन्य बसों के भी बताए जाते हैं।
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बस में बेबस 'आधी आबादी': महिलाओं की सुरक्षा-सुविधा के दावे कागजी, ऐसा है आगरा की सिटी बसों का हाल
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 02 Oct 2021 10:17 AM IST
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आगरा सिटी बस का हाल
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा सिटी बस
- फोटो : अमर उजाला
टोकने पर भी महिला सीट से नहीं उठे
महिला आरक्षित सीट पर पुरुष बैठे थे। एक महिला के शिकायत करने पर परिचालक ने टोका तो बोले स्टॉप आने वाला ही है। यह स्टॉप कैंट स्टेशन तक नहीं आया। परिचालक ने एक महिला से पैसे ले लिए लेकिन टिकट नहीं दिया। महिला ने दो-तीन बार टोका भी। परिचालक के गले में परिचय पत्र नहीं था।
छेड़छाड़ कर मनचला भाग निकला
सेंट जोंस चौराहा आने वाला था, तभी महिला यात्री से एक मनचले ने छेड़छाड़ की। विरोध जताने पर आसपास के लोग आरोपी को पकड़ते इससे पहले ही वह कूदकर भाग गया। साथी यात्रियों ने अफसोस जताते हुए कहा कि ये लफंगे बस में चढ़ते ही इसीलिए हैं। पुलिस की व्यवस्था होती तो ऐसा नहीं होता।
महिला आरक्षित सीट पर पुरुष बैठे थे। एक महिला के शिकायत करने पर परिचालक ने टोका तो बोले स्टॉप आने वाला ही है। यह स्टॉप कैंट स्टेशन तक नहीं आया। परिचालक ने एक महिला से पैसे ले लिए लेकिन टिकट नहीं दिया। महिला ने दो-तीन बार टोका भी। परिचालक के गले में परिचय पत्र नहीं था।
छेड़छाड़ कर मनचला भाग निकला
सेंट जोंस चौराहा आने वाला था, तभी महिला यात्री से एक मनचले ने छेड़छाड़ की। विरोध जताने पर आसपास के लोग आरोपी को पकड़ते इससे पहले ही वह कूदकर भाग गया। साथी यात्रियों ने अफसोस जताते हुए कहा कि ये लफंगे बस में चढ़ते ही इसीलिए हैं। पुलिस की व्यवस्था होती तो ऐसा नहीं होता।
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सिटी बस (फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सिटी बसों में तीन सबसे बड़ी समस्याएं
अनदेखी: महिला आरक्षित सीट पर बैठ जाते हैं पुरुष। महिलाओं के आने पर भी जगह नहीं दी जाती है।
अव्यवस्था: आपातकालीन नंबर या तो लिखे नहीं हैं या आसानी से नजर आने वाले स्थान पर नहीं हैं।
अनुचित व्यवहार: मनचले अनुचित स्पर्श करते हैं, सीट नहीं मिलने पर यह समस्या अधिक आती है।
अनदेखी: महिला आरक्षित सीट पर बैठ जाते हैं पुरुष। महिलाओं के आने पर भी जगह नहीं दी जाती है।
अव्यवस्था: आपातकालीन नंबर या तो लिखे नहीं हैं या आसानी से नजर आने वाले स्थान पर नहीं हैं।
अनुचित व्यवहार: मनचले अनुचित स्पर्श करते हैं, सीट नहीं मिलने पर यह समस्या अधिक आती है।
आगरा: सिटी बस में चढ़ते यात्री
- फोटो : अमर उजाला
'मनचले परेशान करते हैं'
सिटी बस में सफर कर रही एक नर्स ने बताया कि बस में मनचले परेशान करते हैं। टकराने के लिए रास्ते में खड़े हो जाते हैं। कितना भी कहो, हटते नहीं हैं। पुलिस की व्यवस्था होनी चाहिए। छात्रा ने कहा कि बस में बैठने के लिए जगह नहीं मिलती। महिला सीट पर भी पुरुष बैठे रहते हैं। इससे दिक्कत होती है। महिलाओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएं।
एक अन्य छात्रा ने कहा कि मनचले घूरते रहते हैं। डर लगता है। इसलिए लड़कियां जहां बैठती हैं, उनके पास ही बैठती हूं। बस में सुरक्षा का अहसास नहीं होता। व्यवस्था की जाए। युवती ने कहा कि बस का माहौल सही नहीं लगता। आए दिन लड़के कमेंट करते थे। कोई मदद के लिए भी नहीं आता था। अब रिक्शे से जाना शुरू कर दिया है।
सिटी बस में सफर कर रही एक नर्स ने बताया कि बस में मनचले परेशान करते हैं। टकराने के लिए रास्ते में खड़े हो जाते हैं। कितना भी कहो, हटते नहीं हैं। पुलिस की व्यवस्था होनी चाहिए। छात्रा ने कहा कि बस में बैठने के लिए जगह नहीं मिलती। महिला सीट पर भी पुरुष बैठे रहते हैं। इससे दिक्कत होती है। महिलाओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएं।
एक अन्य छात्रा ने कहा कि मनचले घूरते रहते हैं। डर लगता है। इसलिए लड़कियां जहां बैठती हैं, उनके पास ही बैठती हूं। बस में सुरक्षा का अहसास नहीं होता। व्यवस्था की जाए। युवती ने कहा कि बस का माहौल सही नहीं लगता। आए दिन लड़के कमेंट करते थे। कोई मदद के लिए भी नहीं आता था। अब रिक्शे से जाना शुरू कर दिया है।
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सिटी बस (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
'अधिकारी निरीक्षण करते थे तो व्यवस्था ठीक थी'
सिटी बस के परिचालकों ने बताया कि दो साल पहले तक कैमरे काम करते थे। फोन से बस की लोकेशन पता चल जाती थी। लेकिन बाद में कई बसों से कैमरों को निकाल लिया गया। दो साल पहले एक अधिकारी थे। वह महिला सुरक्षा को लेकर बहुत सख्त थे। रोज निरीक्षण करते थे। तो कैमरे भी चालू हालत में रहते थे। अब कोई अधिकारी ध्यान नहीं देता है।
टोको तो झगड़ा करते हैं मनचले
बस परिचालक आशीष दुबे ने कहा कि भगवान टॉकीज पर कोचिंग हैं। सुबह-शाम बहुत लड़के आते हैं। इनकी आड़ में मनचले लड़कियों से अभद्रता करते हैं। कुछ कहो तो झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।
सिटी बस के परिचालकों ने बताया कि दो साल पहले तक कैमरे काम करते थे। फोन से बस की लोकेशन पता चल जाती थी। लेकिन बाद में कई बसों से कैमरों को निकाल लिया गया। दो साल पहले एक अधिकारी थे। वह महिला सुरक्षा को लेकर बहुत सख्त थे। रोज निरीक्षण करते थे। तो कैमरे भी चालू हालत में रहते थे। अब कोई अधिकारी ध्यान नहीं देता है।
टोको तो झगड़ा करते हैं मनचले
बस परिचालक आशीष दुबे ने कहा कि भगवान टॉकीज पर कोचिंग हैं। सुबह-शाम बहुत लड़के आते हैं। इनकी आड़ में मनचले लड़कियों से अभद्रता करते हैं। कुछ कहो तो झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।
