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साल में दो बार खुलता है शाहजी मंदिर, वसंती पोशाक धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे श्रीराधा-रमणलाल
Sat, 25 Jan 2020 10:39 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 25 Jan 2020 10:39 AM IST
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सोने-चांदी के झूले में विराजमान ठा. राधारमन फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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वसंत पंचमी पर भक्त ठाकुर जी के दर्शनों का लाभ ले सकेंगे। वृंदावन के शाहजी मंदिर में विराजमान श्रीराधा-रमणलाल वसंती पोशाक धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। पावन अवसर पर अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए हजारों भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
वसंती कमरे में सफाई करते कर्मचारी
मंदिर के वसंती कमरे में लगे विभिन्न रंगों के बेशकीमती झाड़-फनूसों, स्वर्णमयी दीवार, गोलाकार छत पर की गई पच्चीकारी, विभिन्न रंगों के दर्पण के बीच दूर दराज से आए भक्त इस पल के साक्षी बनेंगे।
शाहजी मंदिर के बगीचे में चांदी के हिंडोले में विराजमान राधारमण लाल जू महाराज
- फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण के निज धाम वृंदावन में टेढ़ा खंभा मंदिर के नाम से विख्यात शाहजी मंदिर अपनी अलग धार्मिक पहचान रखता है। वसंत पंचमी के अवसर पर इस मंदिर के विशेष वसंत कमरे में विराजमान ठाकुर राधारमण लाल जी (राधा-कृष्ण जी) के दुर्लभ दर्शनों के लिए देश के कोने कोने से भक्तों का सैलाब उमड़ता है।
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फूल बंगले में विराजे श्रीराधा रमण लाल
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन के शाहजी मंदिर का यह कमरा वर्ष में सिर्फ दो बार ही खुलता है। प्रथम बार वसंत पंचमी पर दो दिन व दूसरी बार श्रावण मास में त्रयोदशी व चतुर्दशी के दिन ठाकुर जी इस कमरे में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस मंदिर में नवाबी शैली की झलक मिलती है। मंदिर के चौक में अन्य सखियों की मूर्तियों के साथ नवाब वाजिद अली शाह की टोपी लगाए सखी वेष में मूर्ति है। यह स्वयं में हिंदु-मुस्लिम सद्भाव का एक प्रमाण है। पूरे मंदिर पर दो प्रभाव स्पष्ट दृष्टिगोचर होते हैं, पहला नवाबी तथा दूसरा विदेशी कला का। मंदिर में 15 फुट के टेढ़े खंभों का प्रयोग, मुंडर रोमन शैली के अनुरूप हुआ है। मंदिर में बेशकीमती झाड़-फानूस, दर्पणों एवं दरवाजों का स्टाइल नवाबी संस्कृति को दर्शाते हैं।
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वसंती कमरे में बिखरी अलौकिक आभा
कमरे की सजावट के प्रमुख आकर्षण प्राचीन झाड़-फनूसों व कांच आदि की साफ-सफाई का कार्य शनिवार शाम तक जारी रहा। व्यवस्थापक प्रशांत शाह ने बताया कि ठाकुर जी को वसंती पोशाक धारण कराने के साथ-साथ उनका श्रृंगार भी वासंतिक होगा। मंदिर के संचालक शाह प्रशांत कुमार ने बताया कि उनके पूर्वज स्व. शाह कुंदन लाल जी और फुंदन लाल जी मूल रूप से लखनऊ के निवासी थे। उनकी ठाकुर जी के प्रति अगाध आस्था थी। इनका लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह से गहरा दोस्ताना था। सन 1858 में गदर के दौरान जब अंग्रेजों वाजिद अली शाह को गिरफ्तार कर लिया तो इनके पूर्वज वृंदावन में आकर बस गए। उन्होंने ही सन 1860 में इस मंदिर की नींव रखी थी। इसके आठ साल बाद सन 1868 में बसंत पंचमी के दिन ही यह भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ था। इस मंदिर में ठाकुर राधारमण लाल जी के श्री विग्रह सर्व प्रथम इसी कमरे में स्वर्ण सिंहासन में विराजमान हुए थे। तभी से इस कमरे का विशेष महत्व है।