श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिन्जय जैन ने आठ जून को कहा था कि मैं अपने मैनेजर से बात कर रहा था। किसी ने वीडियो बना ली होगी। इस बात को 15 दिन बीत गए, लेकिन सच्चाई से पर्दा नहीं उठ सका। मॉकड्रिल की सच्चाई जग जाहिर करने वाला वो अनजान कौन था। इस सवाल पर अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। 28 अप्रैल को चार वीडियो संचालक कक्ष में बनाए गए। एक कुर्सी पर डॉ. अरिन्जय जैन 26 अप्रैल का वाकया बता रहे हैं। उनके सामने एक व्यक्ति स्टूल पर बैठा है। दूसरा व्यक्ति खड़ा है। जिस धारा प्रवाह अंदाज में डॉ. जैन मॉकड्रिल का किस्सा सुना रहे हैं उससे जाहिर होता है कि वहां बैठे सब लोग खास हैं। कोई बाहरी नहीं। उन्ही में से एक व्यक्ति ने रिकार्डिंग की। प्रशासन ने जांच में डॉ. अरिन्जय को अघोषित क्लीनचिट दी, लेकिन क्या उनके कहे गए शब्दों की जांच की गई।
श्री पारस अस्पताल: 15 दिन बीते... जांच हो गई, नहीं पता ‘किसी’ कौन था, जानिए डॉ. अरिन्जय जैन ने क्या कहा था?
- जो सिलिंडर भेजे वो गंभीर मरीजों के लिए कितनी देर को पर्याप्त थे।
- अगर ऑक्सीजन पर्याप्त थी तो तीमारदारों से सिलिंडर क्यों मंगाए गए थे।
- 22 गंभीर मरीज थे तो फिर 16 की डेथ ऑडिट ही क्यों कराई गई।
- ऑक्सीजन कमी से मौतें नहीं हुई तो अचानक 16 मौतों क्या वजह रही।
- संचालक के बयानों का मिलान वीडियो में कही बातों से क्यों नहीं किया गया।
- पीड़ितों ने जो बयान दर्ज कराए उन्हें जांच में अहिमियत क्यों नहीं दी गई।
- महामारी में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी फिर दोबारा अस्पताल खोलने और फिर कोविड अस्पतालों में शामिल करने की अनुमति किसने दी।
बाईपास स्थित श्री पारस अस्पताल के मालिक डॉ. अरिंजय जैन पर दर्ज केस की जांच वायरल हुए चार वीडियो पर अटक गई है। 15 दिन बाद भी पुलिस यह पता नहीं कर सकी है कि वीडियो किसने और कब बनाए। इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ हुई या नहीं। इन वीडियो को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुलिस की जांच आगे बढ़ सकेगी। बाईपास स्थित श्री पारस अस्पताल के मालिक डॉ. अरिंजय जैन के खिलाफ थाना न्यू आगरा में आठ जून को मुकदमा दर्ज कराया गया था। वादी उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री हैं। इसमें आरोप लगाया गया कि सात जून को सोशल मीडिया पर तथाकथित वीडियो वायरल हुआ। इसमें डॉ. अरिंजय जैन द्वारा ऑक्सीजन गैस मोदी नगर, गाजियाबाद स्थित प्लांट पर न होने और तथाकथित मॉक ड्रिल की बात कही गई है, जबकि जिला प्रशासन ने सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई थी। डॉ. जैन के बयान से जनमानस में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई, जबकि आगरा में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता थी। इस मामले में लोकसेवक के आदेश का उल्लंघन, महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
थाना न्यू आगरा के प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह बालियान के मुताबिक, विवेचना में वायरल हुए चार वीडियो सामने आए। इनकी पुलिस ने जांच की। इसमें डॉक्टर की आवाज सुनी जा सकती है, जबकि एक व्यक्ति नजर आ रहा है। 18 लोगों के बयान दर्ज किए गए। एक संदिग्ध युवक से पूछताछ भी गई। शक है कि उसने वीडियो बनाया। मगर, युवक ने पूछताछ में वीडियो नहीं बनाने की बात कही। उसके मोबाइल में भी वीडियो नहीं मिला। इस पर मोबाइल को जब्त करके फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है, जिससे डिलीट हुए डाटा को रिकवर किया जा सके। उधर, वीडियो बनाने के बाद किसी तरह की छेड़छाड़ कर वायरल किए गए हैं या नहीं? यह पता करने के लिए फोरेंसिक लैब में वीडियो की सीडी बनाकर भेजी गई है। इसकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है। एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि एसपी क्राइम और सीओ हरीपर्वत के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है। वीडियो किसने बनाया और किसने वायरल किया? यह पता किया जा रहा है। वीडियो में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं हुई? इसके बारे में पता करने के लिए फोरेंसिक साइंस लैब से रिपोर्ट मांगी है।