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वट सावित्री व्रत: सुहागिनों के लिए खास है ये व्रत, गजकेसरी योग और रोहिणी नक्षत्र देंगे पूजा का कई गुना फल, जानिए विधि

Thu, 10 Jun 2021 10:51 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 10 Jun 2021 10:51 AM IST
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Vat Savitri Vrat 2021 Puja In Agra By Married Woman For Husband Long Live
वट सावित्री व्रत: पूजा करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाएं करती हैं। गुरुवार को ही शनि जयंती भी मनाई जाएगी। शनि देव को प्रसन्न करने को शनि मंदिरों में हवन पूजन किया गया। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि अखंड सौभाग्य और संतान प्राप्ति की कामना से इस व्रत को रखा जाता है। अमावस्या तिथि को रोहिणी नक्षत्र, गजकेसरी योग, बुधादित्य योग, सूर्य एवं चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे। अत: यह व्रत फलदायी होगा। पूजा का समय प्रात: काल से मध्याह्न 12:15 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य शिल्पा जैन ने बताया कि हिंदू शास्त्रों में वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास माना गया है। मान्यता के अनुसार, देवी सावित्री ने अपने पति को इसी वृक्ष के नीचे पुन: जीवित किया था। तभी से इस दिन वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। 

Vat Savitri Vrat 2021 Puja In Agra By Married Woman For Husband Long Live
पूजा के दौरान महिलाएं - फोटो : self

पूजा विधि 
कोरोना काल में घर से बाहर वट वृक्ष तक जाना संभव नहीं हो तो वट की टहनी मंगाकर इसे गमले में लगाएं। थाली में रोली, चावल, पीला चंदन, कलावा, कल्प सूत्र, भीगा हुआ चने की दाल, पुष्प, धूप, दीप व फलों के साथ टहनी की जड़ में अर्घ्य दें।

Vat Savitri Vrat 2021 Puja In Agra By Married Woman For Husband Long Live
वट सावित्री व्रत पर पूजा करतीं महिलां - फोटो : self
पूजा के लिए सत्यवान सावित्री की कथा सुनें। पूजा के बाद फल, वस्त्र व सुहाग की सामग्री मंदिर में माता गौरी को अर्पित करें। अपने बुजुर्गों को भी दे सकती हैं। शनि देव मंदिरों में शनि जयंती पर हवन, पूजन के कार्यक्रम होंगे। जिन लोगों पर शनि की छाया है, वह सुबह स्नान के बाद शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करें। 
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Vat Savitri Vrat 2021 Puja In Agra By Married Woman For Husband Long Live
वट वृक्ष की पूजा करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि माता सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थीं। इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। ऐसे में इस वृक्ष की पूजा से तीनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही अखंड सौभाग्य के साथ संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। 
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Vat Savitri Vrat 2021 Puja In Agra By Married Woman For Husband Long Live
vat - फोटो : vat
वट सावित्री व्रत में ब्रह्मा, विष्णु महेश तीनों देवों का ध्यान करते हुए व्रत रखा है -वीना देवी
 
सावित्री अमावस्या के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। देवों का ध्यान करते हुए व्रत रखा है। पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखा जा रहा है।  - रूचि यादव 

आज अमावस्या पर व्रत रखकर भगवान विष्ष्णु और भोलेनाथ से पति की दीर्घायु और समृद्धि की कामना करूंगी। - सीमा देवी
 
माता सावित्री ने अमावस्या का व्रत रखकर अपने पति को दीर्घायु किया था। सावित्री माता को साक्षी मानते हुए पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखा है।  - विनीता देवी 
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