केंद्र और राज्य सरकारें निर्माण श्रमिकों और मजदूरों के लिए कितनी भी योजनाएं ले आएं, लेकिन वह इन योजनाओं का लाभ नहीं ले रहे हैं। आगरा में उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत 5.85 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। इनमें इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7667 जबकि चालू वित्तीय वर्ष में एक महीने में 689 पंजीकरण हुए हैं।
करीब 3.50 लाख श्रमिक ही असल में काम कर रहे हैं। मौजूदा व्यवस्था में सिर्फ कार्मिकों का पंजीकरण तो हो सकता है पर नाम नहीं हट सकता। इस वजह से संख्या बढ़ती दिख रही है। हालांकि बढ़ती संख्या के बावजूद बोर्ड की ओर से चलाई जा रहीं नौ कल्याणकारी योजनाओं में से सिर्फ चार के ही आवेदन पहुंच रहे हैं। इनमें भी दो योजनाओं के आवेदनों का आंकड़ा सैकड़ा भी पार नहीं कर रहा।
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विभाग के पास कन्या विवाह सहायता योजना के 468, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना के 355, मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना के 48 और संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना के 21 आवेदन पहुंचे। कुल पंजीकृत और सक्रिय श्रमिकों की संख्या का यह एक फीसदी भी नहीं है। योजनाओं के लाभ के लिए श्रमिक को पोर्टल या कार्यालय में जाकर आवेदन करना होता है।
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उप श्रम आयुक्त सियाराम ने बताया कि किसी भी आवेदन के मिलने पर उसमें लगे दस्तावेजों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाता है। विभाग भी लगातार श्रमिकों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम चलाता है।
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17.72 लाख है भवन निर्माण से अलग श्रमिक
भवन एवं अन्य सन्निर्माण से जुड़े श्रमिकों के अलावा अन्य श्रेणी के श्रमिक भी होते हैं। इनका पंजीकरण श्रम विभाग के ई-श्रम पोर्टल पर होता है। मौजूदा समय में आगरा जिले में 17.72 लाख श्रमिक श्रम विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत हैं। वहीं, फिरोजाबाद में 10.98 लाख, मथुरा में 9.72 लाख और मैनपुरी में 8.18 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं।
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नए श्रम कानून बनेंगे सहारा
उप श्रम आयुक्त सियाराम ने बताया कि मौजूदा श्रम कानूनों की जगह जल्द ही नए श्रम कानून ले लेंगे। नए कानून में हर श्रमिक को नियुक्ति पत्र दिया जाना जरूरी होगा। इससे उनकी ग्रेच्युटी व अन्य सुविधाओं पर कोई गड़बड़ी नहीं कर सकेगा। फिलहाल कानून के नियम बनाने का काम चल रहा है। नियमों के बनने के साथ ही आम जनता व विशेषज्ञों से उनकी राय व आपत्तियां लेकर निस्तारण भी किया जा रहा है।