लगभग ढाई महीने बंद रहने के बाद सोमवार से इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायकक्षों में एक बार फिर वकीलों की बहस और माई लॉर्ड जैसी आवाजें गूंजीं। पर इस बार नजारा एकदम बदला हुआ था। न तो अदालत के कमरे ठसाठस भरे थे और न ही कॉरिडोर में काला कोट और गाउन पहने वकीलों का झुंड था। जो बहस करने आए वो सफेद शर्ट और पैंट में नेक बैंड के साथ थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट : सोशल डिस्टेंसिंग के साथ शुरू हुई खुली अदालत में सुनवाई
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खुली अदालत में सुनवाई को लेकर हाईकोर्ट की कोविड 19 कमेटी ने पहले ही कड़ी गाइड लाइन जारी की है। लिहाजा उन्हीं वकीलों को भीतर जाने की अनुमति दी गई, जिनका कोई केस लगा था। सभी के लिए ई पास जरूरी था।
मुंशियों को भीतर जाने की अनुमति नहीं थी, इसलिए वकीलों को अपने मुकदमे की फाइलें खुद ही अदालत तक ले जानी पड़ी। सिर्फ सरकारी वकीलों और 65 से कम उम्र के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को ही बिना ई पास के भीतर जाने की अनुमति थी। उनकी सूची पहले से गेट पर थी। नाम बताने पर भीतर जाने दिया जा रहा था।
बहस के दौरान जज, वकील और कर्मचारियों सभी के चेहरों पर मास्क थे। एकाध लोग मास्क की जगह रूमाल लगाकर गए तो जजों ने ही टोक दिया और मास्क पहनकर ही भीतर आने के लिए कहा। दो तीन जज फुल ड्रेस में थे, बाकी ने इन दिनों के लिए निर्धारित डेस पहनी हुई थी। वकील भी पूरा एहतियात बरत रहे थे।
गेट पर मेडिकल टीम मौजूद थी जो थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही भीतर जाने दे रही थी। कोर्ट परिसर के बाहर काफी भीड़ थी। मगर भीतर सीमित लोगों का ही प्रवेश होने से स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में थी। आपात स्थिति के लिए एंबुलेंस मौजूद रही। वकीलों को गेट संख्या एक और तीन से प्रवेश दिया गया।
कचहरी में नहीं हो रहा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन
हाईकोर्ट और केंद्र तथा राज्य सरकारों के सख्त दिशा निर्देशों के बावजूद जिला न्यायालय में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। सोमवार को फौजदारी न्यायालय और सभी कार्यालय खुले होने की वजह से कचहरी में भीड़ बढ़ी तो सोशल डिस्टेंसिंग दरकिनार हो गई।

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