भटककर आए बादलों ने बुधवार को ऐसा डेरा जमाया कि दुबके सूरज को धूप दिखाने का मौका नहीं मिला। पछुआ विक्षोभ की सक्रियता से कई बार बारिश हुई। इससे अधिकतम पारा सात डिग्री सेल्सियस धड़ाम हो गया। नमी के उच्च स्तर पर रहने और बर्फीली हवाओं के कारण गलन फिर बढ़ गई। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक बृहस्पतिवार को भी बारिश के आसार हैं। ठंड अभी और बढ़ेेगी। तेज बर्फीली हवाओं संग बुधवार को कई बार बरसा पानी कुंभ क्षेत्र में परेशानी का कारण बना। कई सेक्टरों में हवा से शौचालय और घाटों पर चेंजिंग रूम उखड़ गए। अस्थायी डेरे, छावनी उड़ गई। घाटों पर फिसलन बढ़ गई। जगह-जगह जलजमाव और कीचड़ से श्रद्धालुओं का पैदल चलना मुश्किल हो गया।
कुंभ 2019: तेज हवा संग बरसा पानी, घाटों पर बढ़ी फिसलन, जगह-जगह जलजमाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंगलवार आधी रात तेज आंधी के बाद बरसा पानी कल्पवासियों के साथ-साथ मेले में कारोबार करने वालों की मुश्किलें बढ़ गईं। बैरिकेडिंग और सड़क के बीच पॉलिथीन की छावनी बनाकर रहने वालों के तंबू उड़ गए। रात भर लोग ठिठुरते रहे। मीना बाजार में कई दुकानों में तेज बौछार से पड़ा बारिश का पानी नुकसान का कारण बना।
पौष पूर्णिमा के दिन तपे सूरज की तपिश ने आवारा बादलों को डेरा जमाने का मौका दे दिया। अचानक गर्म हुआ मौसम बदरी छाते ही सामान्य हुआ। मंगलवार देर रात तेज हवाओं संग हुई बारिश ने मौसमी उठापटक को गति दे दी। हाल यह रहा कि 24 घंटे में ही अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री से लुढ़ककर 19.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। न्यूनतम तापमान तीन डिग्री सेल्सियस ऊपर चढ़कर 13 से बढ़कर 16 डिग्री सेल्सियस पर आ टिका।
संगम नोज सहित गंगा के घाटों पर मिट्टी गीली होने से फिसलन बढ़ गई। संगम नोज पर तो प्रशासन ने पुवाल डलवाने का काम किया। वहीं नागवासुकि घाट समेत अन्य घाटों पर फिसलन के कारण स्नानार्थियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।
मौसम विज्ञानी प्रोफेसर एचएन मिश्रा के मुताबिक वायुमंडल में शीतोष्ण चक्रवात प्रभावी होने से नमी बढ़ी है। उत्तर पश्चिम से आए बादलों के डेरा जमाने से बारिश के आसार बने हैं। यह बारिश किसानों के लिए सोना है। वहीं अभी ठंड और बढ़ेगी। गलन भी प्रभावी रहेगी।
मिर्जापुर से बुधवार को परिवार के साथ संगम नोज पहुंचे राजदेव ऐसा फिसले कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। एक्सरे कराने पर फैक्चर तो नहीं निकला लेकिन सूजन से उन्हें वहीं रुकना पड़ा। इसी तरह रीवा से आए त्रिलोक ज्ञानी दंपति भीगने से कोल्ड अटैक का शिकार हो गया। 60 वर्ष की उम्र में उन्हें पहली बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। वहीं सचल स्वास्थ्य दल के डॉक्टरों ने उनका उपचार कर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा।
मेला क्षेत्र में घाट के किनारे बनाए गए दर्जनों शौचालय उखड़ गए। कहीं-कहीं तो जलजमाव से कीचड़ के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सेक्टर छह, सात, नौ, दस और ग्यारह में बारिश से कल्पवासियों की परेशानियां बढ़ गई है। गोपाल पंडा के शिविर में तीन दिन पहले पत्नी के साथ आए सोहन टेंट (रावटी) में बारिश का पानी भरने से दोपहर तक पूजन नहीं कर पाए। कई बार शिकायत के बाद भी उन तक राहत नहीं पहुंची। बारिश के प्रकोप से परेशानी के साथ लोगों को मेला क्षेत्र में धूल से राहत मिली।