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माघ मेला : पहली बारिश में मेले की तैयारियां धड़ाम, एक सप्ताह में कैसे बसेगा मेला

अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 06 Jan 2022 11:21 PM IST
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Magh Mela: Preparations for the Mela in the first rain, roads collapsed
Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : प्रयागराज

माघ मेले की तैयारी पिछड़ने से चिंतित प्रशासन की मुश्किलें बृहस्पतिवार को हुई बारिश ने और बढ़ा दी हैं। दिन भर हुई बारिश से मेला क्षेत्र में जगह-जगह सड़कें धंस गई हैं। कई जगहों पर अफसरों और ठेकेदारों ने बालू लदे वाहन भी रोक दिए। इससे दलदली जमीन पर बालू बिछाने, समतलीकरण समेत अनेक काम प्रभावित हो गए।



मकर संक्रांति के साथ ही माघ मेले की शुरुआत हो जाएगी। इसके विपरीत अभी तक मेला क्षेत्र में जगह-जगह पानी लगा हुआ है। जमीन समतलीकरण का काम भी अभी काफी पीछे है। मेला क्षेत्र में सड़कों के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत हुई थी। इस पर मेला प्रशासन ने भुगतान रोके जाने की चेतावनी दी थी।

बारिश के बाद इन शिकायतों को दूर करने के दावाें की सच्चाई भी सामने आ गई तथा जगह-जगह सड़कें धंस गईं। जलभराव वाले स्थानों पर बिछाने तथा समतलीकरण के लिए सेक्टर पांच से बालू लाया जा रहा था लेकिन सेक्टर तीन में वाहनों को रोक दिया गया। मजदूरों को डर था कि  बालू लदे वाहनों के गुजरने से कहीं सड़कें धंस न जाएं। बारिश की वजह से टेंट लगाने समेत अन्य तैयारियां भी प्रभावित हुईं।

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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : प्रयागराज

एक सप्ताह में कैसे बसेगा मेला, नहीं बंटी सुविधा पर्ची
मकर संक्रांति से माघ मेले की शुरुआत हो जाएगी। वहीं इस बार 17 जनवरी से कल्पवास शुरू होगा। ऐसे में ज्यादातर कल्पवासियों के मकर संक्रांति से पहले ही आ जाने की उम्मीद है। संस्थाआें के आने का क्रम तो अभी से शुरू हो गया है। इसके विपरीत मेले की तैयारियों की स्थिति यह है कि अभी तक संस्थाओं को सुविधा पर्ची तक नहीं मिली है। बृहस्पतिवार को बारिश के बीच ही सुविधा पर्ची के लिए लंबी कतार लगी थी।

इतना ही नहीं संस्था प्रतिनिधियों को दो-तीन दिन बाद सुविधाएं दिए जाने की बात कही गई। इससे उनमें नाराजगी रही। गौर करने वाली बात यह भी है कि अभी बड़ी संस्थाओं को ही सुविधा पर्ची मिली है। बड़ी संख्या में संस्थाआें को  सुविधा पर्ची नहीं मिली है। इसके अलावा नई संस्थाओं को सुविधाएं देने पर अभी तक निर्णय ही नहीं हुआ है। इस पर निर्णय के लिए शनिवार को बैठक बुलाई गई है। इसके बाद उन्हें भूमि आवंटित की जाएगी। फिर सुविधा पर्ची दी जाएगी। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि  एक सप्ताह में तंबुओं का नगर कैसे बस पाएगा।

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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : प्रयागराज

...आखिर कहां गई जमीन
माघ मेला क्षेत्र में संस्थाओं को भूमि आवंटन को लेकर भी गंभीर शिकायतें हुईं हैं। मेला प्रशासन का दावा है कि इस बार मेला क्षेत्र के दायरे में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है। यानी, 640 हेक्टेयर में ही मेला बसाने का निर्णय लिया गया है। इसके विपरीत ज्यादातर संस्थाओं ने जमीन में कटौती की शिकायत की है। वशिष्ठ भवन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट को पिछले वर्ष 200 गुणे 160 वर्ग फीट जमीन दी गई थी।

इसके विपरीत इस बार 50 फीसदी जमीन भी नहीं दी जा रही। इस ट्रस्ट में तीन बार सांसद रहे डॉ.राम विलास दास वेदांती महाराज का भी शिविर लगता है। मेला प्रशासन कार्यालय पहुंचे ट्रस्ट के प्रतिनिधि ने मौके पर और कम जमीन होने की शिकायत की। राम हर्षण दास शिविर की संचालक ममता मिश्र समेत अन्य संस्था के लोगों ने भी कम जमीन दिए जाने की शिकायत की। इतना ही नहीं कई जगहों पर संस्थाओं को आवंटित जमीन पर अवैध कब्जा की शिकायतें लेकर भी लोग मेला प्रशासन कार्यालय पहुंचे थे। इस तरह की शिकायत सेक्टर एक और दो में ज्यादा हैं।

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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : प्रयागराज

आनंद गिरि की संस्था गंगा सेना का भी मेला में लगेगा शिविर
बड़े हनुमान मंदिर के पूर्व व्यवस्थापक आनंद गिरि की संस्था गंगा सेना का भी माघ मेला में शिविर लगेगा। विगत वर्षों में संस्था का अक्षय वट मार्ग पर शिविर लगता रहा लेकिन आनंद गिरि इस समय जेल में बंद हैं। ऐसे में इस बार शिविर के लिए किसी ने आवेदन नहीं किया था। इसकी वजह से वहां की जमीन दूसरी संस्था के नाम आवंटित कर दी गई। बृहस्पतिवार को मेला प्रशासन कार्यालय पहुंचे गंगा सेना के प्रतिनिधि धीरेंद्र महाराज ने शिविर के लिए जमीन की मांग की। उन्हें सेक्टर दो या पांच में जमीन दिए जाने की बात कही जा रही है।

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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : प्रयागराज

गंगा जल हुआ गंदा, प्रशासन की नजर में सब ठीक
गंगा नदी में भूरे जल की शिकायत बृहस्पतिवार को भी रही। इस तरह की शिकायतें मिलने पर मंडलायुक्त संजय गोयल ने गंगा नदी में मिल रहे नालों के पानी के शोधन की समीक्षा की। अफसरों ने बताया कि  जिले में कुल 76 नाले हैं। इनमें से 16 नालों का पानी एसटीपी में शोधन के बाद गंगा में जाता है। वहीं 60 नालों के पानी के शोधन की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। नगर निगम विभिन्न तकनीकी से इनका शोधन कराता है। इसके बाद पानी गंगा में जाता है। अफसरों ने इन नालों के पानी की जांच रिपोर्ट भी पेश की। रिपोर्ट के अनुसार पानी स्नान योग्य है।

हालांकि, मंडलायुक्त ने पानी को और साफ किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने 60 नालों की रैंडम सैंपलिंग कर दो दिन में जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के भी निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने शोधन प्रक्रिया से जुड़ी संस्थाओं का भुगतान किए जाने का भी निर्देश दिया। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम के अफसरों को हर एक दिन बाद गंगा जल की जांच करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने नालों के किनारे बसे लोगों के लिए जागरूक अभियान चलाने की भी बात कही। ताकि, लोग नालों में कूड़ा न फेंके।

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