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प्रतापगढ़ बवाल: 'रात में अस्पताल में लड़कियां बुलाते थे, उससे मना किया था पर मजबूरी मार गई'; बहुत रोई सहेली
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:49 PM IST
सार
निजी अस्पताल में पहले काम करने वाली मृतक युवती की सहेली ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि एक डॉक्टर अस्पताल में रात में लड़कियां बुलाता था। युवती की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
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रानीगंज के दुर्गागंज में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के दौरान मची भगदड़
- फोटो : संवाद
प्रतापगढ़ के रानीगंज थाना इलाके के दुर्गागंज बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में काम करने वाली महिलाकर्मी की मौत पर जमकर बवाल हुआ। उधर, अस्पताल में दम तोड़ने खाली युवती की सहेली शुक्रवार को फूट-फूटकर रोई। कहा कि बचपन की साथी चली गई। मृतका ने बताया था कि अस्पताल का डॉक्टर लड़कियां बुलाता था। उसने नौकरी से मना किया था लेकिन क्या करती, गरीबी ने उसे मजबूर कर रखा था। मृतक युवती की सहेली ने बताया कि प्रयागराज से आने वाला डॉक्टर रात में अस्पताल में लड़कियां बुलाता था। जब उसकी सहेली ने संचालक से शिकायत की तो उस पर ही उल्टा आरोप लगाया जाने लगा।
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रानीगंज के दुर्गागंज में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के दौरान मची भगदड़
- फोटो : अमर उजाला
'उसे अस्पताल की नौकरी छोड़कर सिलाई सीखने को बोला था'
सहेली ने उसे पूरी बात बताई थी। उसे अस्पताल की नौकरी छोड़कर सिलाई सीखने को बोला था, लेकिन परिवार का खर्च चलाने के लिए वह मजबूरी में नौकरी कर रही थी। युवती के पिता की मौत हो चुकी है। मां दिव्यांग है। एक छोटी बहन घर पर ही रहती है। शुक्रवार को वह अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जिद करती रही।
सहेली ने उसे पूरी बात बताई थी। उसे अस्पताल की नौकरी छोड़कर सिलाई सीखने को बोला था, लेकिन परिवार का खर्च चलाने के लिए वह मजबूरी में नौकरी कर रही थी। युवती के पिता की मौत हो चुकी है। मां दिव्यांग है। एक छोटी बहन घर पर ही रहती है। शुक्रवार को वह अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जिद करती रही।
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रानीगंज के दुर्गागंज बाजार में निजी अस्पताल के सामने तैनात पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में अक्सर होता रहा है बवाल
दुर्गागंज बाजार स्थित मां मां मल्टी मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में अक्सर मरीज के तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच बवाल होता रहता था। युवती की मौत के बाद अस्पताल में अनैतिक कार्यों की भी चर्चा हो रही है। सरायलेतराय के रहने वाले राजकुमार पटेल से 2017 में प्रयागराज के डॉ. केपी सिंह, डॉ. वसीम व सुनील यादव ने मकान किराए पर लिया था। कुछ दिनों बाद ही मकान में मां मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल खोल दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक साल बाद से ही अस्पताल में मरीजों के इलाज को लेकर बवाल व हंगामा होने लगा।
दुर्गागंज बाजार स्थित मां मां मल्टी मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में अक्सर मरीज के तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच बवाल होता रहता था। युवती की मौत के बाद अस्पताल में अनैतिक कार्यों की भी चर्चा हो रही है। सरायलेतराय के रहने वाले राजकुमार पटेल से 2017 में प्रयागराज के डॉ. केपी सिंह, डॉ. वसीम व सुनील यादव ने मकान किराए पर लिया था। कुछ दिनों बाद ही मकान में मां मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल खोल दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक साल बाद से ही अस्पताल में मरीजों के इलाज को लेकर बवाल व हंगामा होने लगा।
युवती की मौत पर आक्रोशित लोगों को लाठी मारता पुलिसकर्मी
- फोटो : संवाद
कर्मचारी संग चिकित्सक को लेकर अनैतिक कृत्यों की चर्चाएं आम थीं। कोरोना काल में भी स्वास्थ्य कर्मचारियों व मरीज के तीमारदार से मारपीट हुई थी। लोगों का कहना है कि मरीजों के साथ ही बाहरी लोगों का भी अस्पताल में आना जाना था, जिसमें युवतियां भी शामिल रहती थीं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के एआरओ आरजी चौधरी का कहना है कि तीन साल पहले से अस्पताल का पंजीयन हुआ है।
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कुंडा कोतवाली का घेराव करने पहुंची ग्रामीण महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
पुरुष पीछे हटे तो महिलाओं ने संभाला मोर्चा, सहमे लोग
प्रतापगढ़ में अस्पताल की महिलाकर्मी की मौत के बाद शुक्रवार को तीन किमी का सफर तय कर पहुंचे ग्रामीण अस्पताल में तोड़फोड़ को बढ़े तो पुलिस ने सख्ती दिखाई। इससे प्रदर्शनकारी पुरुष पीछे हटे तो महिलाएं पुलिस के सामने आ गईं। पुलिसकर्मी जब वीडियो बनाने लगे तो वे और आक्रोशित हो उठीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आक्रोशित महिलाएं व पुरुष शव लेकर पैदल ही निकले। पुलिसकर्मी सभी को समझाते हुए रास्ते से लौटाने की कोशिश करते रहे लेकिन कोई सुनने को राजी नहीं था।
प्रतापगढ़ में अस्पताल की महिलाकर्मी की मौत के बाद शुक्रवार को तीन किमी का सफर तय कर पहुंचे ग्रामीण अस्पताल में तोड़फोड़ को बढ़े तो पुलिस ने सख्ती दिखाई। इससे प्रदर्शनकारी पुरुष पीछे हटे तो महिलाएं पुलिस के सामने आ गईं। पुलिसकर्मी जब वीडियो बनाने लगे तो वे और आक्रोशित हो उठीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आक्रोशित महिलाएं व पुरुष शव लेकर पैदल ही निकले। पुलिसकर्मी सभी को समझाते हुए रास्ते से लौटाने की कोशिश करते रहे लेकिन कोई सुनने को राजी नहीं था।
