लॉक डाउन में कोविड संक्रमण से बचने की जद्दोजहद गंभीर मरीजों पर भारी पड़ रहा है। इस दौरान सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद होने से हजारों सर्जरी अटकी हैं। सिर्फ इमरजेंसी में घायल गंभीर मरीजों के हड्डी और महिलाओं के प्रसव संबंधी ऑपरेशन ही किए जा रहे हैं। स्टोन, ह्दय, अपेंडिक्स, यूट्रस, कैंसर से जुड़े ऑपरेशन और प्लास्टिक सर्जरी लगभग ठप है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले दो महीने में करीब 40 हजार सर्जरी रुकी पड़ी हैं।
प्रयागराजः लॉक डाउन के चलते अटकीं 40 हजार सर्जरी, निजी और सरकारी अस्पताल बंद होने से बढ़ी समस्या
डॉक्टरों के मुताबिक एक निजी अस्पताल में दो सर्जरी का औसत मान लिया जाए तो सामान्य दिनों में एक दिन में करीब 700 छोटे-बड़े ऑपरेशन होते रहे हैं। अब इनकी संख्या दस फीसदी ही बची है, वो भी गंभीर मरीजों के उपचार तक सिमटी है। इस हिसाब से पिछले दो महीने में करीब 40 हजार सर्जरी के मरीजों को आपरेशन का इंतजार है।
सृजन अस्पताल के निदेशक डॉ. बीबी अग्रवाल बताते हैं कि प्लान सर्जरी ठप है। गिल्टी, गांठ, सिस्ट, ट्यूमर, हर्निया आदि के मरीज परेशान हैं। लॉक डाउन में वे आएं भी तो सर्जरी संभव नहीं है। वहीं स्त्री प्रसूति रोग के विशेषज्ञ भी प्रसव संबंधी ऑपरेशन ही कर रहे हैं। एसआरएन अस्पताल में कॉडियोलॉजी विभाग के डॉ. पीयूष सक्सेना का कहना है कि यही हार्ट अटैक के गंभीर मरीजों का भी है। सर्जरी नहीं, सिर्फ दिल के मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं। चिकित्सक स्टेंट, पेसमेकर लगाने समेत अन्य सर्जरी नहीं कर रहे हैं। सिर्फ गंभीर मरीजों का उपचार कर उनकी जान बचाई जा रही है।
जीवन ज्योति अस्पताल की निदेशक डॉ. वंदना बंसल का कहना है कि सर्जरी ही नहीं, आईवीएफ के मरीजों की परेशानी बढ़ी है। कोविड संक्रमण से बचाने की सतर्कता में काम करना मुश्किल हो रहा है। सिर्फ गंभीर मरीजों को देखा जा रहा है। जैसे किसी की आंत उलझ गई या अपेंडिक्स फट गया या बच्चा गर्भ में फंस गया तो उन्हें ही ओटी तक ले जाया जा रहा है, वह भी जांच के बाद और एहतियात के साथ सर्जरी की जा रही है।
स्थितियों से साफ है कि सर्जरी न होने से कई मरीजों की बीमारियां गंभीर हो रही हैं। जल्द अस्पताल खोलने का आदेश नहीं हुआ तो मरीजों की परेशानी बढ़ जाएंगी, तब उस पर नियंत्रण मुश्किल होगा।
शासन और प्रशासन के निर्देश पर अस्पताल बंद होने से मरीज परेशान हैं। निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले सर्जरी के मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं। गंभीर मामलों में ही सर्जरी की जा रही जिसमें मरीज की जान बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी होता है। सीएम और प्रमुख सचिव से वार्ता हुई है, जल्द समाधान की उम्मीद है। - डॉ. सुशील सिन्हा, अध्यक्ष उप्र. नर्सिंग होम एसोसिएशन
