बेमौसम बारिश, तेज आंंधी, तूफान और ओलावृष्टि से शहर सहित गंगापार और यमुनापार में हाहाकार मचा हुआ है। शहर और ग्रामीण इलाकों की सारी सड़कें पत्ते और पेड़ की टूटी टहनियों से पट गई हैं। शुक्रवार की बारिश ने जमकर तबाही मचाई। खेतों में खड़ी फसल जमींदोज हो गई। खड़े पेड़ उखड़ गए।
आम के बौर को भी काफी नुकसान हुआ। जिससे किसानों की जान हलक में अटकी रही। सबसे ज्यादा नुकसान आम और अरहर की फसल को हो रहा है। मौसम का कहर इसी तरह कायम रहा तो आम खास लोगों के लिए ही रह जाएगा। साथ ही आटा, गेहूं के दाम सहित दलहन और तिलहन के दाम भी गरीबों को रुला सकते हैं।
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कई पेड़ उखड़े
- फोटो : Amar Ujala
इलाके के शंकरगढ़ और लालापुर क्षेत्र में ओला गिरने से किसान बर्बाद हो गया। गेहूं, चना, मसूर, सरसों, मटर सहित दलहन व सब्जी की फसलों के साथ ही आम के बौर भी गिरकर नष्ट हो गए। जिससे रात दिन पशुओं से खेतों की रखवाली करने वाले किसानों की जान हलक में फंस गई है। शंकरगढ़ क्षेत्र के गोबरा हेवार, कपारी, तालापार, हिनौती, कटरा, सोनवर्षा, ओसा, पूरे बघेल सहित लालापुर के दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं।
पहाड़ी गांव के समरेंद्र सिंह, जीत बहादुर सिंह, जूही के श्रीनाथ सिंह, राजेंद्र सिंह, डेराबारी के किसान जगत राज सिंह, लालापुर के शंकरलाल पांडेय, नगरवार के राम गणेश पाठक, मानपुर के मनोज सिंह, मझियारी के जय प्रकाश, तीरथ क़पुरिहा, गोझवार के कृष्णराज सिंह, गोबरा के श्याम लाल उर्फ पेट्टू ,गोइसरा के अतुल उर्फ डब्ल्यू तिवारी आदि ने बताया की मूसलाधार बारिश के साथ पड़े ओले से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। अगर किसानों को फसल का मुआवजा नहीं मिला तो कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे।
शुक्रवार दोपहर बाद तेज आंधी बारिश एवं भीषण ओलावृष्टि से फसलें पूरी तरह चौपट हो गई। जिससे किसानों के पेशानी पर बल पड़ने लगा है। चार महीने की सारी खून पसीने की कमाई चौपट होने के कगार पर पहुंच गई है। शाम चार बजे के तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश होने लगी।
उसी के साथ ओला भी गिरना शुरू हो गया। क्षेत्र के मझियारी लकोसा. कोहड़िया धवैया. रूम, बासी, ओठगी आदि गांवोंके किसानो ने बताया लगातार हो रही वर्षा से रवी की फसल वैसे भी खराब हो गई थी। इस समय मसूर, मटर, सरसो आदि फसल पकी हुई थी। इस ओलावृष्टि से सब चौपट हो गई। ग्राम पंचायत गड़ैया, लोनीपार प्रधान प्रतिनिधि विजय सिंह, कोहड़िया प्रधान राम भवन सिंह, धर्मेंद्र, शिवशंकर आदि ने फसल नुकसान के लिए सरकार से मुआवजे की मांग की है।