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UP News: भगवान शिव के ये मंदिर हैं बेहद खास, दर्शन मात्र से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, जानिए इनसे जुड़ी कहानियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 24 Jul 2022 06:26 PM IST
सार

भारत में भगवान शिव के कई मंदिर मौजूद हैं, जिनमें 12 ज्योतिर्लिंगों की मान्यता अलग है। लेकिन भगवान शिव के कई ऐसे पावन धाम हैं, जहां दर्शन मात्र से साधक के सभी दु:ख दूर और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं, ऐसे ही खास मंदिरों के बारे में। 
 

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These temples of Lord Shiva are very special, wishes are fulfilled by mere darshan
रमायन गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

इटावा जिले में भरथना के रमायन गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर आसपास क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। तहसील मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह शिवालय महामंशापूर्ण श्री गंगाधर विश्वनाथ शिव मंदिर के भी नाम से भी जाना जाता है।प्राचीन निर्माण कला  और नैसर्गिक सौंदर्य को संजोए यह मंदिर आसपास के जनपदों में भी विशिष्ठ स्थान रखता है। 



मंदिर की बनावट में मेहराबदार दरवाजे,कलात्मक चित्रकारी से सुसज्जित खंभे और  बरामदे  मंदिर की सुंदरता को खुद ही बयां करते हैं। दक्षिण भारतीय शिल्प कला शैली से ओतप्रोत लगभग 80 फुट ऊंचाई वाले मुख्य मीनार (स्तंभ) के ऊपरी हिस्से पर स्वर्ण पत्र जड़ित कलश उसके ऊपर त्रिशूल की स्थापना मंदिर के वैभव का दर्शन कराता है।मुख्य द्वार के सामने विशाल सरोवर में बतखों की अठखेलियां परिसर की रमणीकता को और शोभायमान करता है।

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These temples of Lord Shiva are very special, wishes are fulfilled by mere darshan
रमायन गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मंदिर के मुख्य दरबार मे  पावन शिवलिंग पर सर्पछत्र के अलावा सूर्य भगवान,गौरी-गणेश आदि देवो की प्राचीन मूर्तिया विराजित है। वही मंदिर के चारों कोने में बने मीनार (स्तंभ) में मां दुर्गा,हनुमान आदि अन्य देवों की प्राचीन मूर्तियां स्थापित है। पिछले पांच वर्षों में आस्थावान श्रदालुओं ने  मंदिर परिसर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत व अन्य जरूरी निर्माण कार्य कराए हैं, जो  अभी भी जारी है। 

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रमायन गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मंदिर में खासतौर पर सावन माह और महाशिवरात्रि पर्व पर  भागवत/राम कथा,हवन,भजन-कीर्तन व भंडारा आदि अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है। सावन माह के अलावा भी निरंतर भक्तों का आना जाना रहता है। कानपुर, आगरा, मैनपुरी,एटा ,कन्नौज,फर्रूखाबाद औरैया आदि दूर दराज के  शिवभक्त श्रद्धालु आकर पावन शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजन अर्चना करते हैं।

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ग्राम बेला कपूरपुर में स्थित मार्कण्डेय आश्रम - फोटो : अमर उजाला

सावन में आस्था का केंद्र है बेला कपूरपुर का मार्कण्डेय आश्रम
हरदोई के पिहानी में महाभारत कालीन स्मृतियों को संजोए ग्राम बेला कपूरपुर में स्थित मार्कण्डेय आश्रम और इसके पास का तालाब शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। सावन माह में यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। यहां लगने वाला अमावस्या का मेला दूरदराज तक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि बेला कपूरपुर स्थित यह आश्रम उन स्थानों में से एक है। जहां जहां मार्कडेय ऋषि ने तापस्या की थी। भगवान शिव की निरंतर पूजा कर कम आयु में ही नियत अपनी मृत्यु को भी टाल देने के लिए मार्कण्डेय ऋषि ने तपस्या यहीं से शुरू की थी। 

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ग्राम बेला कपूरपुर में स्थित मार्कण्डेय आश्रम - फोटो : अमर उजाला

अल्पायु में मृत्यु टालने को ऋषि मार्कण्डेय ने यहीं पर की थी तपस्या
महान ऋषि मृकंदु और उनकी पत्नी मरुदमती ने शिव की पूजा की और उनसे पुत्र प्राप्त करने का वरदान मांगा। तब उन्हें पृथ्वी पर छोटे जीवन वाले पुत्र का वरदान मिला। पुत्र का जन्म होने पर उन्होंने उसे मार्कण्डेय नाम दिया। मार्कंडेय बड़े होकर शिव के बहुत बड़े भक्त बन गए और अपनी नियत मृत्यु के दिन उन्होंने शिवलिंग के अपने निराकार रूप में शिव की पूजा जारी रखी। 

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