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विकास दुबे का गैंग पुलिस ही नहीं कई विभागों में था फिट, मोबाइल कॉल डिटेल से होगा राजफाश

राहुल त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 21 Jul 2020 08:13 AM IST
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Vikas Dubey Encounter News: Vikas Dubey's gang
विकास दुबे फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दो जुलाई से सुर्खियों में आया बिकरू गांव और कुख्यात विकास दुबे के रोज नए काले कारनामे बाहर आ रहे हैं। जब तक पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीटर के मोबाइल नंबर की सीडीआर सार्वजनिक नहीं करती तब तक विकास दुबे का गुर्गा गैंग अपराध छोड़ने वाला नहीं है। पुलिस की लाख सख्ती के बाद भी वारदात में शामिल उसके कई नामजद साथी आज भी पुलिस पकड़ से दूर है और उनकी आर्थिक और अन्य प्रकार की मदद स्थानीय गुर्गों के द्वारा ही किए जाने की पूरी आशंका है।
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Vikas Dubey Encounter News: Vikas Dubey's gang
पुलिस ने विकास दुबे के गैंग का खात्मा कर दिया है - फोटो : Amar Ujala
राजनीतिक रौब, आपराधिक हनक, दौलत के दम पर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का कानपुर शहर से लेकर बिल्हौर तहसील के गांव-गांव दबादबा के कहानियां किसी से छिपी नहीं हैं, लेकिन दो जुलाई की घटना के बाद विकास दुबे द्वारा अपने मोबाइल को तोड़ देने के बाद उसके कई खासम-खास साथियों तक अभी भी पुलिस नहीं पहुंच सकी है।

 
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Vikas Dubey Encounter News: Vikas Dubey's gang
विकास दुबे - फोटो : अमर उजाल ा
जब तक पुलिस द्वारा विकास दुबे के मोबाइल का सीडीआर सार्वजनिक नहीं करती तब तक उसके पारिवारिक और गांव-गांव फैले गुर्गा गैंग कानून की दायरे में फसने वाला नहीं है। विकास दुबे का गुर्गा गैंग उसके नाम से कई प्रकार के अपराध में संलिप्त हैं जिनमें कृषि, उद्यम, व्यापारिक, घरेलू भूमि पर कब्जा सहित चौबेपुर की फैक्ट्रियों में गाड़ियां लगवाने, पूर्ति विभाग में राशन दुकानों को निलंबन और बहाल कराने, ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के बंदूक के दम पर ठेकेदारी करने में शामिल हैं।

 
Vikas Dubey Encounter News: Vikas Dubey's gang
विकास दुबे का एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
घटना के बाद ऐसे लोग या तो भूमिगत हो गए हैं या फिर पुलिस की नजरों से बचकर भाग गए हैं जब भी पुलिस की जांच टीम गांव पहुंचती है तब उसके गुर्गे आम ग्रामीणों की तरह ही आसपास मौजूद रहकर पूरी जानकारी भी हासिल करते हैं। घटना के बाद से विष्णु पाल सिंह उर्फ जिलेदार ग्राम प्रधान भीटी, शिव तिवारी उर्फ हीरू पंडित बिकरू रोजगार सेवक, बिकरू ग्राम प्रधान अंजलि दुबे के पति दीपू दुबे आदि घटना के बाद से गायब हैं।

 
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कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
इन नामी लोगों के अलावा चौबेपुर, शिवराजपुर ब्लाक के ही नहीं बल्कि ककवन इलाके के कई ग्राम प्रधान, राशन विक्रेता घटना के बाद आज तक नजर नहीं आए हैं।वहीं विकास दुबे के मोबाइल की सीडीआर सार्वजनिक होने पर कई सफेदपोश लोगों, उद्यमियों, व्यापारियों, राजनीतिक दलों के लोगों के नाम भी सामने आ सकेंगे, जो कुख्यात का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अपराध में सहायता करते थे।

 
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