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Vikas Encounter: विकास खत्म, अफसर-नेताओं का राज दफन, जिंदा रहता तो सत्तापक्ष-विपक्ष के कई नेताओं के चेहरों से उठता नकाब
Sat, 11 Jul 2020 07:07 PM IST
शिखा पांडेय
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 11 Jul 2020 07:07 PM IST
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
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दहशतगर्द विकास दुबे के खात्मे के साथ ही तमाम राज भी दफन हो गए। वह जिंदा रहता तो प्रदेश और देश के कई बड़े नेता (अलग-अलग पार्टियों के), कारोबारी और नामचीन हस्तियां बेनकाब होतीं। पता चलता कि किस तरह से नेता, पुलिस और अपराधियों का गठजोड़ चल रहा था। इन्हीं लोगों की सरपरस्ती और मदद से विकास दुबे खूंखार अपराधी बना।
विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत उस पर सौ से अधिक केस हुए। जेल जाता रहा, बेल मिलती रही। विकास दुबे शुरू से ही राजनीति में रहा है। डेढ़ दशक तक वो ग्राम प्रधान रहा। आज भी प्रधानी उसके घर में ही है। सबसे पहले वो बसपा से जुड़ा। करीब 15 साल तक बसपा से जुड़ा रहा। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य भी रहा। बसपा सुप्रीमो से लेकर पार्टी के पावरफुल नेताओं से उसका सीधा संपर्क रहा।
विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
इसके बाद सपा और भाजपा नेताओं के संपर्क में आ गया। स्थानीय भाजपा के दो विधायक भी उसके बेहद करीबी हैं। वहीं सांसद भी उसके रुतबे के कायल थे। चुनाव हो या किसी अन्य मामले में समर्थन की जरूरत पड़े तो ये सभी जनप्रतिनिधि विकास का दरवाजा जरूर खटखटाते थे।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
कुछ यही हाल सपा पार्टी के नेताओं व जनप्रतिनिधियों का रहा है। विधायक, सांसद, प्रदेश अध्यक्ष या अन्य किसी पद पर बैठे पार्टी के लोग विकास दुबे के करीबी रहे हैं। विकास जो कहता था वो ये करते थे। पार्टी में फंड भी देता था। शहर के दो सपा विधायक भी उसके नजदीकी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो भी वायरल हो चुकी हैं।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
बसपा सुप्रीमो से सीधे मिलता था विकास
विकास राजनीति में सक्रिय रहा। पार्टी कोई भी मिले, उसका मकसद राजनीति करना था। इलाके में दहशत बनाई, जिससे वोट बैंक इकट्ठा किया और उसी बल पर पार्टियों से डील करता रहा। राजनीति से जुड़े पुराने लोग बताते हैं कि विकास बसपा सुप्रीमो मायावती से सीधे मिलता था। इससे उसकी हनक का अंदाजा लगाया जा सकता था।
विकास राजनीति में सक्रिय रहा। पार्टी कोई भी मिले, उसका मकसद राजनीति करना था। इलाके में दहशत बनाई, जिससे वोट बैंक इकट्ठा किया और उसी बल पर पार्टियों से डील करता रहा। राजनीति से जुड़े पुराने लोग बताते हैं कि विकास बसपा सुप्रीमो मायावती से सीधे मिलता था। इससे उसकी हनक का अंदाजा लगाया जा सकता था।