मेरठ के हस्तिनापुर में हुई डबल मर्डर की वारदात से हर व्यक्ति आहत है। जिसने भी इस सनसनीखेज वारदात को सुना, वह यही कह रहा है कि हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा मिले। इस संबंध में अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को पीड़ित बैंक मैनेजर संदीप से बातचीत की तो उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें बताईं।
बैंक मैनेजर से बातचीत: पत्नी-बेटे को नहीं भुला पा रहे संदीप, शिखा के बारे में बताईं ये अहम बातें
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रक्षाबंधन पर जब संदीप की बहन राखी बांधने के लिए हस्तिनापुर आई थी तो शिखा ने उसे पसंद का सामान दिलाया था, जिसकी अनुमति संदीप से भी नहीं ली थी। वह घर आने वाले सभी मेहमानों की बहुत ज्यादा इज्जत करती थी। रुपये उसके लिए कोई अहमियत नहीं रखते थे। इसलिए हत्या के डर से उसने हत्यारों को लॉकर की सभी चाबी दे दी थी। लेकिन हत्यारों ने उसे बख्शा नहीं। इस बात का संदीप को मलाल है।
संदीप ने बताया कि उसे विश्वास नहीं हो रहा है कि शिखा और उसका होनहार बेटा रूकांश अब इस दुनिया में नहीं है। उसे लग रहा है कि वह अपनी नानी के घर गए हुए हैं। भावुक होते हुए कहा कि उसे उनकी बहुत याद आ रही है। संदीप ने बताया कि वह बैंक में पिछले कई दिनों से जल्दी जा रहे थे, जिस कारण में वह रूकांश को स्कूल भी नहीं छोड़ते थे। खुद शिखा ही उसे तैयार करती थी और स्कूल छोड़कर आती थी। फिर छुट्टी होने पर उसे स्कूल से लेकर आती थी।
शिखा ने लोन लेने के लिए किया था मना
संदीप ने बताया कि उन्हें अच्छा घर बनाने के लिए बैंक से एक करोड़ रुपये का लोन मिल जाता। लेकिन शिखा को कर्जा पसंद नहीं था। संदीप ने बताया कि अपनी मेहनत की कमाई से ही 100 गज का घर खरीदा था। फरवरी 2020 में उसका पूजन किया और वहीं पर रहना शुरू किया था। संदीप ने कहा कि शिखा बहुत ही साधारण किस्म की महिला थी और उसे लग्जरी मकान व गाड़ी का शौक नहीं था। क्योंकि वह पहले से ही सक्षम घर की बेटी थी।
शिखा के परिवार के लोग रुपये में छोटे पर दिल से बहुत बड़े
संदीप ने बताया कि वह शिखा से बेहद प्यार करते थे और उनके बीच कभी कोई अनबन नहीं हुई। शिखा के माता-पिता और भाई भले ही अमीर ना हों लेकिन उनका दिल भी बहुत बड़ा है। वह शिखा से इतना प्यार करते थे कि उसका जन्मदिन हस्तिनापुर आकर धूमधाम से मनाते थे।