शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले
यकीनन वतन पर मिटने वालों के निशां कभी नहीं मिट सकेंगे क्योंकि वे हर देशवासी के दिल में बसते हैं और हर दिल में उनके लिए प्यार और सम्मान हमेशा बरकरार रहेगा। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए शामली के जवान प्रदीप कुमार का शनिवार सुबह पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। लेकिन उनके परिजनों और आस पास के लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
#Pulwama: लोगों की जुबानी जानिए कितने दिलेर और नेक दिल इंसान थे शामली के शहीद जवान प्रदीप
साथ पढ़े और बचपन में साथ खेले दोस्तों की आंखें साथ बिताए वक्त को याद करके भर आती हैं। क्योंकि उनका वो दोस्त अब कभी लौटकर नहीं आ सकेगा। शहीद जवान प्रदीप के घर पहुंचकर जब अमर उजाला संवादाता ने लोगों से बात की तो हर तरफ से एक ही आवाज आ रही थी। बड़े ही नेकदिल इंसान थे प्रदीप। जी हां आइए इन्हीं लोगों की जुबानी जानते हैं आखिर कैसे था गांव का ये लाड़ला जांबाज जवान: -
परिजनों के मुताबिक प्रदीप कुमार ने शिक्षा शामली में ही ग्रहण की। उन्होंने वीवी डिग्री कालेज से बीए की परीक्षा पास करने के बाद 2003 में सीआरपीएफ में मथुरा में भर्ती हुए। उनकी ट्रेनिंग बरेली में हुई।
वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर में हुई थी। शादी होने के डेढ़ साल बाद ही उनकी सीआरपीएफ में नौकरी लग गई थी। शादी के करीब दो-तीन साल बाद से ही वे बच्चों के साथ भले ही गाजियाबाद में रह रहे थे। मगर, बनत से उनका मोह कम नहीं हुआ। जब भी वे छुट्टी आते थे तो यहां भी जरूर आते थे। उनकी लेकर कस्बे में दिनभर लोग चर्चा करते रहे।
कस्बा निवासी आसिफ खान ने कहा कि प्रदीप बहुत ही मिलनसार और व्यवहार कुशल व नेक दिल इंसान थे। दिनेश कुमार ने कहा कि वे जब भी छुट्टी आते थे, सभी लोगों से मिलते जुलते थे। राजेंद्र सिंह ने बताया कि रास्ते में कोई भी मिला, बिना बोले और हाल-चाल जाने बिना नहीं रहते थे। ओंकार सिंह ने बताया कि उनके बारे में जितना भी कहा जाए, वह कम है। उनकी अच्छाई और व्यवहार हमेशा याद किया जाएगा। वे मेहतनी और काम के प्रति लगनशील रहते थे।
