शहर के बीचोंबीच आ चुके रोडवेज बस अड्डे लोगों की परेशानी का सबब बन चुके हैं। रोडवेज चालक और परिचालक अड्डे के बाहर बस खड़ी करके सवारी बैठाते हैं और बीच सड़क पर ही सवारी को उतारते हैं। शहर के अंदर भी बसों को आगे निकालने की रेस होती है। ऐसे में बस आपस में तो टकराती ही हैं वहीं अन्य वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी दुर्घटना का करण बनती हैं। इसके अलावा डग्गामार बस भी शहर में बिना किसी डर के फर्राटा भर रहीं हैं। अमर उजाला ने सोमवार को रोडवेज बसों के अलावा डग्गामार बसों को चेक किया तो बड़ी भयावह स्थिति देखने को मिली।
यूपी: सिस्टम को नहीं दिखता 'चौधरी साहब का ये छोरा', पूरी सड़क को रोडवेज बसों ने घेरा
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शहर जाम से जूझ रहा है। लेकिन दिल्ली रोड पर चालक मनमर्जी कर बीच सड़क पर बस रोककर यात्रियों को बस में बैठाते और उतारते हैं। पुलिस-प्रशासन को ऐसी नकली रोडवेज बसें दिखाई ही नहीं दे रहीं। ऐसी कई बसों के पीछे ‘चौधरी सहाब का छोरा’ ‘लाडली’ ‘सड़क की रानी’ जैसे स्लोगन लिखे मिलेंगे। रोडवेज जैसी दिखने वाली नकली रोडवेज बसों को लेकर अमर उजाला ने पहले भी अभियान चलाया। इन बसों के चालक भी बीच सड़क पर खड़ी कर यात्रियों को बैठाते है। बसों का रंग और पहचान भी ऐसी है कि यात्री बस में चढ़ जाए तो समझ ही नहीं पता कि कि यह रोडवेज है या फिर रोडवेज जैसी दिखने वाली नकली बस। उसके बाद यात्री बस से उतरने की कोशिश करता है तो परिचालक उतरने भी नहीं देते। बस में यात्री के साथ भी अभद्रता कर दी जाती है। यह बसें मेरठ से गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली बॉर्डर तक चलती है। किराया भी रोडवेज बस से कम नहीं है। ऐसे में यह बसें रोडवेज को भी चूना लगा रहीं है। इन बसों का पीछे का शीशा भी तोड़कर रोडवेज जैसा रंग कर दिया गया है। दिल्ली रोड पर इन बसों का पूरा कब्जा है। लेकिन कहीं भी यह बस ट्रैफिक पुलिस को नहीं दिखाई देती। जबकि ट्रैफिक पुलिस शहर में यातायात माह में लगातार वाहनों पर चालान काटते हुए कार्रवाई कर रही है। एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी का कहना है कि पूर्व में भी इन बसों को सीज कर पुलिस लाइन भेजा गया है। यदि फिर से ऐसी बसें चल रही हैं तो ट्रैफिक पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
भैसाली बस अड्डे पर सबसे ज्यादा परेशानी
दोपहर करीब एक बजे अमर उजाला टीम भैसाली अड्डे पर पहुंची तो आनंद विहार जाने वाली भैसाली डिपो बस संख्या यूपी-15 सीटी 9449 और दूसरी बस संख्या यूपी-15एटी 8858 सड़क पर एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में थी। दोनों ही बसों के चालक बस को पीछे हटाने को तैयार नहीं थे। ऐसे में सड़क पर लंबा जाम लगा था। लोग हॉर्न बजा रहे थे, लेकिन चालक मानने को तैयार नहीं थे। सड़क पर खड़ी बस का चालक दूसरी बस को अड्डे से बाहर नहीं आने दे रहा था। कैमरा चलने के बाद ही चालकों ने अपनी बसों को हटाया। इसके बाद ही जाम खुला। इसके अलावा डग्गामार बस चालक यूपी-14 एक्स 9934 बस अड्डे के सामने से ही बिना किसी डर के सवारी बैठा रहे थे। इन बसों पर कार्रवाई के लिए रोडवेज का कोई कर्मचारी तैनात नहीं था। इसके बाद अमर उजाला की टीम मेट्रो प्लाजा के सामने पहुंची। यहां भी एक डग्गामार बस यूपी-15डीटी 8729 भैसाली डिपो की बस के समानांतर सड़क पर दौड़ रही थी। दोनों बसों में आगे निकलकर सवारी उठाने की होड़ मची थी। इस होड़ में दोनों चालक ये भी भूल गए कि सड़क पर दूसरे वाहन और पैदल राहगीर भी चल रहे हैं। उनकी वजह से पीछे जाम लगा है और दुर्घटना होने का खतरा है।
मंडलायुक्त के आदेश भी नहीं मान रहे अधिकारी
गत 15 नवंबर को हुई आरटीओ की बैठक में मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने डग्गामार बसों को लेकर कड़ा विरोध जताया था। मंडलायुक्त ने आरटीओ को डग्गामार बसों पर लगाम कसने के निर्देश दिए थे। लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी डग्गामार बस पकड़ी नहीं जा सकी हैं। सोमवार को अमर उजाला के कैमरों में कई डग्गामार बसें कैद हुईं। ये बस बिना किसी डर के भैसाली अड्डे के बाहर से संचालित की जा रही हैं।
बस अड्डे मुख्य समस्या
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी का कहना है कि शहर के यातायात के लिए चार प्रमुख समस्याएं हैं। इनमें रोडवेज के दोनों बस अड्डे सबसे मुख्य हैं। जब तक भैसाली और सोहराबगेट बस अड्डे बाहर शिफ्ट नहीं होंगे, जाम की समस्या बनी रहेगी। दोनों बस अड्डे से सुबह सात से रात्रि नौ बजे तक 4500 से पांच हजार बसों का आवागमन होता है। दूसरी समस्या ट्रांसपोर्ट नगर है। यहां नौ से दस हजार ट्रकों का आवागमन होता है। इनर रिंग रोड का काम भी बीच में है। इससे ट्रैफिक को शहर से निकलना पड़ता है। शहर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से वाहन सड़क पर खड़े करने से जाम लगता है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, आरटीओ में पंजीकृत वाहनों की संख्या सात लाख पार कर चुकी है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जिले में करीब एक लाख वाहन ऐसे हैं जिनका रजिस्ट्रेशन दूसरे जिलों और राज्यों का है। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए चौराहों के विकास का प्लान कई बार तैयार हो चुका।