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काशी और शिव से सत्यार्थी ने जोड़ा अपना नाता, हंसाया, समझाया और जगाया
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 18 Jan 2017 10:08 PM IST
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कैलाश सत्यार्थी का शताब्दी व्याख्यान
- फोटो : अमर उजाला
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बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता व नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के खचाखच भरे स्वतंत्रता भवन में ‘सुरक्षित बचपन सुरक्षित भारत’ पर व्याख्यान दिया। उनके शताब्दी व्याख्यान को सुनने के लिए सभागार छोटा पड़ गया लेकिन सुनने वालों का उत्साह और जोश दूना हो गया। आगे की स्लाइड्स में देखें, युवाओं में भरा जोश
नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में उनके शताब्दी व्याख्यान को सुनने के लिए सभागार छोटा पड़ गया लेकिन सुनने वालों का उत्साह और जोश दूना हो गया। एक घंटे के भाषण के दौरान उन्होंने महामना के ज्ञान, विज्ञान, कला, संस्कृति, अध्यात्म, चिकित्सा की राजधानी बीएचयू पर गर्व जताया तो अपने नाम के साथ शिव के वास का रिश्ता जोड़कर काशीवासियों से रिश्ते का एहसास कराया।
नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
सिर्फ युवाओं व बच्चों को नहीं बल्कि प्रोफेसरों को संकल्प, शपथ और प्रतिज्ञा दिलाकर उन्हें जागृत और प्रेरित करने का काम किया। आखिर में अपनी नोबेल प्राइज स्पीच, जिसमें एक नन्हीं चिड़िया के जज्बे और उसके फर्ज की कहानी और दुष्यंत कुमार की लाइनें ‘हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए’ सुनाकर युवाओं बच्चों की ऊर्जा को और दूना कर दिया। उनके भाषण के दौरान ...हर हर महादेव और भारत माता की जय जैसे नारे भी गूंजते रहे।
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नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
शताब्दी व्याख्यान के बाद मीडिया से रूबरू हुए कैलाश सत्यार्थी ने अपने ‘100 मिलियन कैंपेन’ के बारे में बताया। कहा कि दुनिया में दस करोड़ बच्चे बुनियादी अधिकारों, आजादी, शिक्षा से वंचित हैं। जबकि दस करोड़ युवा ऐसे हैं जो उत्साह और ऊर्जा से भरे हैं।
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नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने युवाओं से आह्वान किया कि वो गुलामी का बंधन तोड़ें। व्यवस्था के खिलाफ सवाल उठाएं। सिर्फ सवाल नहीं बल्कि समाधान ढूंढें। नौजवान वही है जो सवाल उठाने की और समाधान ढूंढने की ताकत रखता हो। हम सब मिलकर नई दुनिया, नई सभ्यता, नई संस्कृति का निर्माण करें, जिसका नेतृत्व आप नौजवान करेंगे।