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बनारसी मास्टर जी ने किया ऐसा काम, अमिताभ से लेकर मंत्री तक कर रहे सलाम

Sun, 02 Jul 2017 10:50 AM IST
amarujala.com, written by शैलेश कुमार शुक्ल
amarujala.com, written by शैलेश कुमार शुक्ल Updated Sun, 02 Jul 2017 10:50 AM IST
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Nandlal Masterji did such a thing from Amitabh to minister Salute him
nandlal master - फोटो : अमर उजाला

कहते हैं अगर दिल में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो दुनिया में कोई भी काम अंसभव नहीं है। इसे एक बार फिर संभव कर दिखाया है बनारस के एक मास्टर जी ने। इनकी तारीफ महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर केंद्रीय मंत्री तक कर रही हैं। आगे की स्लाइड में पढ़ें पूरी कहानी...

Nandlal Masterji did such a thing from Amitabh to minister Salute him
Nandlal Master - फोटो : अमर उजाला

यह कहानी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्श गांव नागेपुर के एक गरीब बुनकर परिवार में जन्मे नंदलाल मास्टर की। जी हां, लोग उन्हें इसी नाम से जानते हैं। नंदलाल जी के जन्म के कुछ दिन साल बाद ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया। पिता की मौत के बाद उन्होंने बहन के यहां रहकर 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद कृषि में बीएससी किया।

Nandlal Masterji did such a thing from Amitabh to minister Salute him
Nandlal Master - फोटो : अमर उजाला

इसी दौरान छुट्टियों में वह अपने गांव आए तो ये देखा कि बच्चे बुनकरी के जरिये बालश्रम कर रहे हैं। यह देख उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 1994 में एक नाइट स्कूल डाला और शाम को बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। वहीं खुद दिनभर बुनकरी का काम करते थे।

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Nandlal Masterji did such a thing from Amitabh to minister Salute him
Nandlal Master - फोटो : अमर उजाला

बुनकरों के बच्चों को पढ़ते देखकर और भी गांवों से बच्चे आने लगे तथा कारवां बनता गया। इस बीच एक दिक्कत आई शाम को लड़कियां स्कूल नहीं आ पा रही थीं। इससे निपटने के लिए उन्होंने दोपहर का स्कूल शुरू किया। फिर क्या था बड़ी संख्या में लड़कियां आने लगीं। आज उनके स्कूल में पांच सौ बच्चे पढ़ते हैं। 10 नाइट स्कूल चलते हैं।

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Nandlal Masterji did such a thing from Amitabh to minister Salute him
Nandlal Master - फोटो : अमर उजाला

नंदलाल जी ने देखा कि गांव की महिलाएं साहूकार से कर्ज लेकर कहती हैं कि उनका बच्चा उनके यहां काम करेगा और कर्ज चुका देगा। साहूकार का कर्ज एक मकड़जाल की तरह होता था जो कभी चुकता नहीं होता था और न बच्चे का बालश्रम खत्म होता था। नंदलाल जी ने इससे निपटने की ठानी।

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