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मलइयो पर डोला पीएम मोदी का मन: जनसभा में अपने संबोधन में किया जिक्र, जानिए इस खास बनारसी मिठाई के बारे में
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Fri, 24 Dec 2021 12:40 AM IST
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पीएम मोदी ने अपने भाषण में किया मलइयो का जिक्र
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के करखियांव में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारसी मिठाई मलइयो और लौगंलता का जिक्र किया। बनारसी मिठाइयों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब तो मलइयो का मौसम भी आ गया है। प्रधानमंत्री ने जैसे ही मलइयो का जिक्र किया तो सभा में मौजूद हजारों की भीड़ ने तालियां बजाईं।
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पीएम मोदी वाराणसी
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बनारस के मिठाइयों में शुमार मलइयो का अपना अलग ही स्थान है। कुछ लोग इसे खाते हैं, तो कुछ लोग इसे पीते है। कुछ लोग कहते है कि कब खाया कब पिया पता ही नहीं चला। सबसे खास बात यह कि मलइयो सिर्फ ठंड के मौसम में ही मिलता है। वैसे तो इस दौर में अब दक्षिण के पकवान कश्मीर में मिलते हैं और पंजाब की लस्सी आसाम और सिक्किम में लेकिन मलइयो पर अब भी काशी का ही एकाधिकार है जो विदेशों तक मशहूर है। दूध से बनने वाली मलइयो की शुरुआत सैकड़ों साल पहले बनारस में ही हुई थी।
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मलइयो
- फोटो : अमर उजाला
काशी की पहचान बन चुका मलइयो का जायका सिर्फ ठंड के दिनों में ही लिया जा सकता है। इसकी भी अपनी वजह है। क्योंकि, ये खास मलइयो ओस की बूंदों से बनता है। जैसे जैसे ठंड बढ़ती है, इसकी खासियत भी बढ़ने लगती है। बनारस में पक्के महाल से लेकर चौक, मैदागिन, गोदौलिया, दशाश्वमेध, गिरजाघर चौराहे तक मलइयो की कई दुकाने आपको मिल जाएंगी।
मलइयो
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मलइयो का दुर्लभ स्वाद बनारस के अलावा दुनिया में कही नहीं मिलेगा। केसरिया दूध की झाग में हल्की मिठास और मनमोहक सुगंध सुबह ए बनारस में चारचांद लगाती है। मुंह में जाते ही इसका स्वाद बनारसीपन घोल देता है। बनारसी मलइयो भरी सर्दी के तीन महीने में बनाई जाती है। जितनी ज्यादा ओस पड़ती है इसकी गुणवत्ता उतनी बढ़ती है।
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मलइयो
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मलइयो बनाने वाले शरद श्रीवास्तव बताते हैं कि कच्चे दूध को बड़े बड़े कड़ाहों में खौलाया जाता है और इसके बाद रात खुले आसमान के नीचे रख दिया जाता है। रातभर ओस पड़ने के कारण इसमें झाग पैदा होता है। सुबह कड़ाहे को उतारकर दूध को मथनी से मथा जाता है। इसमें इलायची, केसर, दूध और मेवा डालकर दोबारा मथा जाता है।

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