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संकट मोचन संगीत समारोह: किशन महाराज के पौत्र ने तबले पर बजाई 500 साल पुरानी शैली, गूंजी तालियों की गड़गड़ाहट

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 09 Apr 2026 10:47 AM IST
सार

Varanasi News: किशन महाराज के पौत्र ने तबले पर 500 साल पुरानी शैली बजाई। पं. शुभ महाराज ने बताया कि 10 लाख बार घर पर बजाते हैं तो एक बार मंच पर पंजाबी गत बजता है। 

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Sankat Mochan Music Festival Kishan Maharaj Grandson Performs 500-Year-Old Style on Tabla
संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला

संकट मोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा की पांचवीं प्रस्तुति लेकर संकट मोचन के मंच पर आए बनारस घराने और पं. किशन महाराज के पौत्र पं. शुभ महाराज ने 500 साल प्राचीन बंदिश बजाई। 250 साल पुरानी गत दुगुन में बजाकर गुरु पं. समता प्रसाद की थाती को याद किया। पंजाबी गत बजाते वक्त कहा कि पं. शारदा सहाय कहते थे कि 10 लाख बार घर पर बजाओ तब एक बार मंच पर पंजाबी गत बजता है। धा-धा धिन... से शुरू किया तो तबले पर पड़ने वाली उनकी थाप इतनी तेज थी कि मंदिर में कभी ढोल तो कभी पखावज की आवाज गूंज रही थी।

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Sankat Mochan Music Festival Kishan Maharaj Grandson Performs 500-Year-Old Style on Tabla
संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला

करीब 60 मिनट तक तबले की थिरकिट के बीच में 10 बार श्रोताओं से संवाद भी किया। कहा कि 22 साल बाद इस मंच पर प्रस्तुति देने आए हैं। शुभ ने तीन ताल में बनारस घराने के टुकड़ा, तोड़ा, तिहाई, परन,गत, गतफर्द का वादन किया। अपने गुरु पं. किशन महाराज की पसंदीदा शिव और गणेश परन भी लोगों के बीच प्रस्तुत किया।

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संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
छोटे दादा गुरु पं. हरि महाराज गलत समय पैदा हो गए। इतने जबरदस्त वादक थे कि उनका हाथ टेढ़ा हो गया था। उनके तबले का अब जिक्र ही हो पाता है। कहीं रिकॉर्डिंग नहीं हैं लेकिन उन जैसे जानकी सहाय और राम सहाय आदि लोगों को मंदिर की इन दीवारों ने सुना हुआ है। एक कायदा उनके नोटबुक में से मिला था जिसको यहां सुना रहा हूं क्योंकि यह बनारस का ही कायदा है।
Sankat Mochan Music Festival Kishan Maharaj Grandson Performs 500-Year-Old Style on Tabla
संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
सितार और तबले से उठी राम-सिया राम की गूंज
छठी प्रस्तुति लेकर आए पं. कुशल दास ने सितार और पं. संजू सहाय ने तबले पर वादन किया। राग परमेश्वरी में आलाप, जोड़ और झाला के बाद उन्होंने तीन ताल में विलंबित और द्रुत गत से जुगलबंदी की। उनींदी आंखों के बीच इन्होंने सितार और तबले पर ऐसी धुन निकाली कि लगा कि राम सिया राम, राम सिया राम की आवाज मंदिर में गूंज रही हो।
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संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
मेवाती घराने ने गाया मृगनयनी को यार नवल रसिया...
मेवाती घराने के कलाकार पं. रतन मोहन शर्मा, तबले पर पं. राम कुमार मिश्र, संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्रा और गायन पर स्वर शर्मा ने संगत की। मृगनयनी को यार नवल रसिया, राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की मनोजवम् मारुत तुल्य वेगं सहित कई शास्त्रीय गीतों को गाकर सुबह दर्शनार्थियों को अपना मुरीद बना लिया।

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