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शब ए बरात: इबादत में गुजारी रात, गुनाहों की मांगी माफी; कब्रिस्तानों पर चिराग रोशन कर पेश किया अकीदत

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 04 Feb 2026 02:27 PM IST
सार

इस्लामी माह शाबान की 15वीं रात शब ए बरात के नाम से जानी जाती है, जिसका अर्थ है गुनाहों से छुटकारे की रात। ऐसे में शब ए बरात पर कब्रिस्तानों और इबादतगाहों में गुलपोशी और चिराग रोशन कर अकीदत पेश किया गया।

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Shab-e-Barat in varanasi worshippers spent entire night in prayer
शब ए बरात - फोटो : अमर उजाला

शब ए बरात पर मंगलवार को इबादतगुजारों ने पूरी रात इबादत में गुजारी। कब्रिस्तानों और इबादतगाहों में गुलपोशी और चिराग रोशन कर अकीदत पेश किया। रातभर इबादत व फातिहा पढ़ने का सिलसिला चलता रहा। इस्लामी माह शाबान की 15वीं रात शब ए बरात के नाम से जानी जाती है, जिसका अर्थ है गुनाहों से छुटकारे की रात। 

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Shab-e-Barat in varanasi worshippers spent entire night in prayer
शब ए बरात - फोटो : अमर उजाला

एक ओर जहां लोगों ने नफ्ली नमाजों व तिलावते कलाम पाक का एहतेमाम कर गुनाहों से तौबा की, वहीं कब्रगाहों पर फातिहा पढ़कर दुनिया से रुखसत हो चुके परिजनों व रिश्तेदारों के लिए दुआ ए खैर मांगी। इससे पहले भोर में उठकर लोगों ने नफ्ली रोजे की नीयत से सहरी की। रोजे की हालत में ही इबादत करते हुए दिन गुजरा। 

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शब ए बरात - फोटो : अमर उजाला
इस बीच लोग हलवा बनाने के लिए नारियल, दाल, खोआ आदि भी खरीदते नजर आए। घर की महिलाओं ने विभिन्न किस्म के हलवा बनाकर नज्र दिलाने के लिए दिलाई। मगरिब की अजान गूंजते ही लोगों ने जहां इफ्तार किया, वहीं मगरिब की नमाज के बाद घरों में फातिहा दिलाई। 
Shab-e-Barat in varanasi worshippers spent entire night in prayer
शब ए बरात - फोटो : अमर उजाला
इशा की नमाज के बाद आस्तानों-कब्रगाहों पर फातिहा पढ़ने के लिए लोग निकले। एक आस्ताने से दूसरे आस्ताने और एक कब्रिस्तान से दूसरे कब्रिस्तान तक आने व जाने का सिलसिला रातभर चलता रहा। 
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शब ए बरात - फोटो : अमर उजाला
कब्र पर गुलपोशी व शमा रोशन करने के बाद लोगों ने दुआएं मांगी। आकर्षक सजावट की गई थी। फातमान, लल्लापुरा, नई सड़क, पीलीकोठी, बड़ी बाजार, कज्जाकपुरा, जलालीपुरा, कोनिया, बजरडीहा, अर्दली बाजार, औरंगाबाद, बादशाहबाग, सालारपुरा, दोसीपुरा, लोहता आदि इलाकों के कब्रिस्तानों, मजारों और इलाबादतगाहों में भीड़ रही। उधर इस पर्व पर कुछ स्थानों पर जलसे हुए।
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