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वाराणसी: सैकड़ों परिवारों ने राहत शिविरों में ली पनाह, बाढ़ पीड़ित बोले- मंत्री जी आए तो मिलीं पूड़ियां, अगले दिन खिचड़ी खाकर हुआ पेट खराब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Tue, 10 Aug 2021 01:13 AM IST
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र ढेलवरिया में राहत शिविर में पहुचे स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल।
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी में बाढ़ पीड़ित लोगों को राहत शिविर में भी राहत नहीं मिल रही है। कहीं बारिश तो कही प्रशासन से मिलने वाली सुविधाओं से लोग परेशान हैं। रविवार को जल शक्तिमंत्री महेंद्र सिंह आए तो बाढ़ पीड़ितों को लेट लतीफ दो पहर पूड़ी सब्जी खाने को मिली और सुबह में ब्रेड भी नाश्ते में मिला। सोमवार को ढेलवरिया प्राथमिक विद्यालय में खिचड़ी खाने से कुछ लोगों को जुलाब हो गया। वहीं नवयुग विद्या मंदिर में सुबह में मिलने वाला ब्रेड भी नहीं मिला।
सोमवार को गंगा और वरूणा का जल स्तर बढ़ने से शिविर में लोगों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई है। शिविरों में खाने की और रहने की समस्याएं बढ़ गई हैं। ढेलवरिया और सरैयां में छह बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं, जिसमें ढेलवरिया प्राथमिक विद्यालय में 17 परिवार के 97 लोग और नवयुग विद्या मंदिर में 20 परिवार के 103 लोग हैं। देखें अगली स्लाइड्स...
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गंगा में मोटरबोट से गश्त करते हुए सुरक्षाकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला।
बड़ा देव मंदिर के पास खुले में 25 परिवार के 150 के करीब लोग टेंट लगाकर रह रहे हैं जो बारिश के दौरान परेशान हो जा रहे हैं। वहीं सरैया के प्राथमिक विद्यालय में 25 परिवार के 148 लोग रह रहे है। जबकि सरैया में दो मदरसों में 10 से 12 परिवार के 70 लोग रह रहे हैं।
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मैं छह अगस्त से शिविर में रह रहा हूं मंत्री जी आए तो दोनों पहर (दोपहर और रात) में पूड़ी सब्जी और सुबह के नाश्ते में ब्रेड मिला। उसके बाद खिचड़ी दी जा रही जिसे खाने से मैं बीमार हो गया। - शिवशंकर शर्मा
खाने के लिए जो भोजन के पैकेट दिए जा रहे हैं वह पर्याप्त नहीं हैं। घर के मर्द बाहर काम की तलाश में बाहर चले जा रहे हैं तो उनके हिस्से का भोजन ही नहीं दिया जा रहा। - पूजा सोनकर
मंत्री जो के आने पर रविवार को राशन किट का वितरण किया गया था। जिसमें किसी को मिला किसी को मिला ही नहीं। अब राशन के लिए आधार कार्ड मांगा जा रहा है। - लल्लन राय
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बारिश में टपकने लगे टेंट, चांदी काटने लगे मकान मालिक
वरूणा नदी के किनार बसे बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाए गए शिविर फुल हो गए है। ऐसे में आसपास के मकान मालिक चांदी काट रहे हैं। ढेलवरिया के बड़ादेव मंदिर कैंप में तिरपाल से कामचलाऊ आशियाना बनाकर रह रहे ट्राली चालक कल्लू ने बताया कि मेरा घर बाढ़ में डूब गया है।
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राहत शिविरों में जगह नहीं बची है। ऊंचाई पर बसे मकान मालिक एक कमरे के लिए दो हजार रुपये प्रति माह की दर से किराया मांग रहे हैं। जिससे मजबूरन कैंप में टेंट लगाकर रहना पड़ रहा है। बारिश के दौरान जमीन गीली होने से गृहस्थी का सामान भीग जा रहा है।
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