पहाड़ों पर हो रही बरसात से बनारस में गंगा अब उफान पर आ गई हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से वरुणा में पलट प्रवाह हो गया है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों ने अब पलायन शुरू कर दिया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से महज 26 सेंटीमीटर नीचे बह रहा है। अनुमान जताया जा रहा है कि शुक्रवार मध्यरात्रि तक गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर जाएगा।
चेतावनी बिंदु के नजदीक पहुंची गंगा : वाराणसी में वरुणा पार इलाके में लोग पलायन को मजबूर, बाढ़ के हालात
बाढ़ बुलेटिन के अनुसार शुक्रवार की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.30 मीटर था, जो दोपहर दो बजे 69.66 मीटर पहुंच गया था। बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे जलस्तर 67.69 मीटर था। इन 24 घंटों में 01.61 मीटर पानी बढ़ गया। शुक्रवार की सुबह आठ से रात आठ बजे तक करीब आधा मीटर की वृद्धि हुई है। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है। प्रयागराज में बढ़ाव जारी होने के कारण बनारस में जलस्तर में और बढ़ाव की आशंका बनी हुई है।
बाढ़ के पानी से घिर गए हैं मकान, बढ़ी धुकधुकी
गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के कारण असि और वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति पैदा हो गई है। गंगा के तटवर्ती इलाकों में लोग दहशत में हैं। पानी से घिर चुके इन मकानों में रहने वालों ने ऊंची बस्तियों में किराए पर कमरा लेकर अपना सामान वहां पहुंचाना शुरू कर दिया है। शक्कर तालाब के चंद्रशेखर ने बताया कि उनके घर में पानी घुस गया है और वह अब ऊंची जगह पर किराए पर कमरा लेकर रहेंगे। नक्खीघाट की शारदा ने बताया कि बीती रात ही उनके मकान के निचले हिस्से में पानी घुस गया। पहला तल्ला पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। अब पूरा परिवार दूसरे तल पर रह रहा है।
छत से लेकर गलियों तक हो रहा शवदाह
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए मुसीबतें भी बढ़ गई हैं। मणिकर्णिका घाट पर जहां छत पर शवदाह हो रहा है, वहीं हरिश्चंद्र घाट के ऊपर गलियों में शवदाह शुरू हो चुका है। गंगा की सभी घाटों का संपर्क पूरी तरह से समाप्त हो गया है। ऐसे में हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका दोनों ही घाटों पर लोगों को शवदाह करने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
सामान के साथ शुरू हो चुका है पलायन
वरुणा किनारे बसी बस्तियां कोनिया, दीनदयालपुर, नक्खीघाट, पुलकोहना में दो सौ से अधिक मकान पानी से घिर चुके हैं। शुक्रवार की सुबह से लोगों अपने जरूरी सामानों के साथ पलायन कर रहे थे। तिनपुलवा के नीचे से होते हुए वरुणा में गिरने वाले नाले के दोनों ओर बने अधिकतर मकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। मुन्नी, अरशद, वकील, इरफान, मो. मुश्ताक, असलम, प्रमोद, अनिल, कमलेश, असलम दर्जी, रमजान, इरफान, बाबू ने अपना घर छोड़कर दूसरी जगह शरण ली है।